माँ श्री शारदा आशीष दरबार में हुई कलश की स्थापनादुर्गा सप्तशती पाठ के साथ होंगे विविध अनुष्ठान

जबलपुर – मॉं आद्यशक्ति पराम्बा की आराधना के महापर्व शारदेय नवरात्र के शुभारंभ पर मां श्री शारदा आशीष दरबार, शक्तिनगर में परम पूज्य आशीष भैया जी के सान्निध्य में भक्तों के द्वारा अखंड ज्योति कलश, तथा खप्पर, जवारे की स्थापना की मां के श्री विग्रह के निकटस्थ भाव में की गई।शहर व अन्य प्रांत से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी दरबार में श्री विग्रह के समक्ष , गुरुदेव के मार्गदर्शन में घट,खप्पर स्थापित किऐ। मां की आराधना का यह क्रम श्रीविद्याचक्रानुसार 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर(श्रीदुर्गा महानवमी)तक चलेगा। मंदिर प्रांगण में इस दौरान विविध अनुष्ठान हो रहे हैं। नित्य दुर्गा सप्तशती पाठ और हवन, ललिता सहस्त्र नाम के पाठ, अर्चन और हवन, श्रीविद्यावाञ्छाकल्प पाठ,श्रीवर्धनी कलश स्थापन और अर्चन ,साथ ही सर्व भक्तजनों के पुण्य लाभ के लिए सायंकाल मां श्रीशारदा की महाआरती, दर्शन होगी,और महिला मंडल द्वारा भजन प्रस्तुत किए जाऐंगे।
मां श्री शारदा दरबार व्यवस्था समिति के मुकेश कुशवाहा , मिलन मुखर्जी,संजय बरहा, जयंत क्षीर सागर, पं.सुबोध मिश्रा, सुधांशु उपाध्याय, संतोष द्विवेदी , संतोष मिश्रा, नीरज पाण्डे, सरबजीत तग्गड़ , मनीष शर्मा, मनीष विश्वकर्मा, मोहन जोशी, सौरभ तिवारी, अमर दुबे, रवि गुजर, कौशलेन्द्र महाजन, के. के. तिवारी, आदर्श तिवारी, करन ठाकुर, राकेश ठाकुर, राम सिंह, एल्वीन भैया,खेमराज वशिष्ठ, गगन वशिष्ठ, सुनील सोनी, सुनील राजपूत, राम शंकर दुबे,, विवेक त्रिपाठी, शिवम त्रिपाठी, रिपुंजय त्रिपाठी, बी.एल. नामदेव, श्रीमति मनजीत कौर तग्गड़ ,शीला मिश्रा, ज्योत्सना मुखर्जी, ममता बरहा, क्षमा त्रिपाठी, राजीव डनायक, आशीष डनायक, आरती द्विवेदी ,सीमा पासी, कृष्णा विश्वकर्मा, कल्पना महाजन, टीनाधौंडियाल , धनुली जोशी (अंटी), सिमरन कौर तग्गड़ , सीमा मिश्रा, मोनी पांडे, शीला कुशवाहा गुजर , स्वाति गुजर, कमलेश बेरी, सुशील कुमार बेरी, पूजा डनायक ,पदमा डनायक , शिवपाल सिंह महदेले,तिलक रतलानी, विमलेश मिश्रा, प्रकाश गायकवाड़ ,जम्मन लोधी, खुशबु गायकवाड़ , प्रणीश जसाटी , अनूप सिंग ठाकुर,सौरभ रजक,सुशील नामदेव,राजीव नामदेव,साहिल नामदेव,बंटी नामदेव,अंकेश नामदेव,आदि के अनुसार भक्ति भाव और श्रद्धा से जुड़ने की मूल वजह मां श्री शारदा आशीष दरबार में हम सभी के मनोवांछित मनोरथ पूर्ण हुए हैं और होते रहे हैं l दूर-दूर तक के भक्त अपनी मन्नतें हेतु श्रद्धा पूर्वक दरबार में अपनी उपस्थिति लगाने पहुंचते हैं!