जयंती पर स्मरण बुंदेली संस्कृति के संरक्षक थे डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव
जबलपुर। बुंदेलखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, लोक साहित्य, कला, परंपराओं और बुंदेली बोली के संरक्षण एवं संवर्धन में डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। जब हिंदी और अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव के बीच क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा था, तब भाषाविज्ञानी एवं शिक्षाविद् डॉ. श्रीवास्तव ने बुंदेली के … Read more