उपभोक्ता मंच ने मनाया “नो यूपीआई डे”


जबलपुर। केन्द्र सरकार ने 2 हजार रू. से ज्यादा यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने का निर्णय पेमेंट एण्ड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 के तहत् लिया है, यह निर्णय लेने के पूर्व में केन्द्र सरकार को इस एक्ट की धारा 10 के अंतर्गत 30 दिनों के भीतर आपत्तियां बुलाना चाहिये था, लेकिन बगैर आपत्तियां बुलाये यूपीआई शुल्क नागरिकों पर थोप दिया गया है।
यह आरोप लगाते हुये डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने बताया कि केन्द्र सरकार भले ही कह रही है कि यूपीआई शुल्क का बोझ आम नागरिकों पर नहीं पड़ेगा। किंतु अभी तक का अनुभव यह है कि हमेशा कोई भी शुल्क जब भी लगाया जाता है तब वह अंततः आम नागरिकों जेब से ही वसूला जाता है। इसी प्रकार से यूपीआई शुल्क भी उपभोक्ताओं से वसूला जायेगा।
जनसंगठनों के सदस्यों ने सिविक सेंटर में एकत्रित होकर प्रदर्शन किया तथा “नो यूपीआई डे” के दुकानदारों एवं नागरिकों में पाम्पलेट बांटे। यह पाम्पलेट मालवीय चौक में भी बांटे गये।
इस अवसर पर एड. वेदप्रकाश अधौलिया, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, यशवंत कोष्टा, श्याम सोलंकी, टी.के. रायघटक, सुभाष चंद्रा, संतोष श्रीवास्तव, रजनी पटेल, उमा दाहिया, डी.आर. लखेरा, पी.एस. राजपूत, एड. घनश्याम सोनकर, दिलीप कुण्डे, अर्जुन कुमार, राजकुमार कुशवाहा, एड. ब्रजेश साहू, राममिलन शर्मा आदि भारी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।