जबलपुर। दुर्गोत्सव शुरू होने से पहले ही शहर में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की अनदेखी की जा रही है। बिना अनुमति डीजे और लाउडस्पीकर बजाए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि रात 10 बजे की समय-सीमा के बाद भी कई स्थानों पर तेज आवाज में डीजे बजने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले को लेकर जनसंगठनों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।जनसंगठनों ने बताया कि 9 अक्टूबर को अपर जिला मजिस्ट्रेट रविशंकर राय ने ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए आदेश जारी कर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद दुर्गोत्सव के पहले ही दिन जगह-जगह नियमों का उल्लंघन देखने को मिला। आरोप है कि 90 प्रतिशत से अधिक डीजे बिना अनुमति के बजाए जा रहे हैं।
जनसंगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले डीजे जब्त किए जाएं और संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। साथ ही, प्रत्येक क्षेत्र में निगरानी समितियों का गठन किया जाए, जो प्रतिदिन ध्वनि प्रदूषण की स्थिति पर नजर रखकर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी मांग की कि अधिकारी प्रत्येक क्षेत्र में जाकर ध्वनि स्तर की जांच करें और प्रतिदिन इसकी रिपोर्ट तैयार करें, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो सके।इन मांगों को लेकर जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने 12 अक्टूबर को अपर जिला मजिस्ट्रेट रविशंकर राय से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। अपर जिला मजिस्ट्रेट ने प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि तत्काल निगरानी समितियों का गठन किया जाएगा और उनसे रिपोर्ट मांगी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ध्वनि प्रदूषण के संबंध में रिपोर्ट प्राप्त की जाएगी।इस अवसर पर डॉ. पी.जी. नाजपांडे, एडवोकेट वेदप्रकाश अधोलिया, सुभाषचंद्र, डी.आर. लखेरा, गीता पांडे, अशोक यादव, यशवंत कोठा, एडवोकेट ब्रजेश साहू तथा राममिलन शर्मा उपस्थित थे।