मरीज की मौत के बाद परिजनों ने हैदराबाद ओमेगा अस्पताल पर लगाया चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप

जबलपुर। हैदराबाद के ओमेगा अस्पताल में उपचार के दौरान जबलपुर निवासी राहुल झारिया की मौत हो गई। मौत के बाद उसकी बहन पुष्पा झारिया सहित अन्य परिजनों ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन कर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया। परिजनों का कहना है कि आंत संबंधी परेशानी के चलते राहुल को 23 सितंबर को आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने आंत में ट्यूमर बताए जाने पर उसकी सर्जरी की, लेकिन इसके बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई।परिजनों के मुताबिक पहली सर्जरी के बाद टांके खुल गए और पेट के भीतर संक्रमण फैल गया। इसके बाद दूसरी सर्जरी की जरूरत बताई गई। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान योजना का पैकेज समाप्त होने की बात कहते हुए परिजनों से चार हजार रुपये नकद मांगे। परिवार ने राशि देने की सहमति जताई, लेकिन सर्जरी अगले दिन तक टाल दी गई।

सर्जरी के बाद बिगड़ती गई हालत

परिजनों का आरोप है कि भर्ती के समय डॉक्टरों ने अल्सर और आंत में गांठ की आशंका जताते हुए तत्काल सर्जरी की। शुरुआती उपचार के बाद राहुल की हालत ठीक लग रही थी, लेकिन बाद में उसकी स्थिति गंभीर होती चली गई। परिजनों के अनुसार पाचन मार्ग में रुकावट के चलते पेट में अपशिष्ट पदार्थ जमा होता रहा और संक्रमण फैल गया। इसके बाद पेट के टांके भी खुल गए।

परिजनों का यह भी दावा है कि बाहर से कराई गई करीब आठ हजार रुपये की बायोप्सी जांच में कैंसर की पुष्टि नहीं हुई थी। इसके बावजूद मरीज की स्थिति को लेकर उन्हें लगातार अलग-अलग जानकारी दी जाती रही। परिजनों ने चिकित्सकों पर समय पर उपचार नहीं करने और संपर्क करने पर उचित जवाब नहीं देने का भी आरोप लगाया है।

आधे घंटे में खून लाने को कहा, नहीं बची जान

परिजनों के मुताबिक राहुल की हालत गंभीर होने के बाद अगली सुबह करीब सात बजे अस्पताल के कर्मचारियों ने तत्काल खून की व्यवस्था करने के लिए कहा और इसके लिए महज आधे घंटे का समय दिया। परिजनों का कहना है कि रातभर उन्हें रक्त की आवश्यकता के संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई थी, इसलिए अचानक इतनी कम अवधि में रक्त की व्यवस्था नहीं हो सकी।आरोप है कि हालत बिगड़ने के बावजूद मरीज को समय रहते किसी बड़े चिकित्सा संस्थान में रेफर नहीं किया गया। अंततः राहुल की मौत हो गई।राहुल परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था। उसके पीछे एक बेटा और दो बेटियां हैं। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई, चिकित्सकीय लापरवाही की जांच और बच्चों के भविष्य को देखते हुए उचित मुआवजे की मांग की है। परिजनों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की भी मांग उठाई है।