पीएम गति शक्ति पर मध्यप्रदेश के नवाचार बने अन्य राज्यों के लिए उदाहरण :राकेश सिंह

केवड़िया (गुजरात)। अधोसंरचना विकास में पीएम गति शक्ति के व्यापक और व्यावहारिक उपयोग की मध्यप्रदेश की पहल को राष्ट्रीय मंच पर सराहना मिली है। गुजरात के केवड़िया में आयोजित चिंतन शिविर में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने पीएम गति शक्ति पर केंद्रित तकनीकी सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने सर्वेक्षण, सड़क नेटवर्क की योजना, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, बजट और निर्माण कार्यों की समय-सीमा निर्धारित करने में इस प्लेटफॉर्म के उपयोग के मध्यप्रदेश के अनुभव साझा किए। सत्र में बताया गया कि प्रदेश के कुछ नवाचारों को राजस्थान, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी अपनाया जा रहा है।
श्री सिंह ने कहा कि पीएम गति शक्ति को अधोसंरचना विकास के लिए एक व्यापक डिजिटल आधार के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। इसकी उपयोगिता बढ़ाने के लिए इसे विभागों की नियमित कार्यप्रणाली से जोड़ना होगा। मध्यप्रदेश ने प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न मॉड्यूल विकसित कर इस दिशा में व्यावहारिक पहल की है।केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित चिंतन शिविर में लगभग 18 राज्यों के लोक निर्माण मंत्रियों ने सहभागिता की। लगभग सभी राज्यों के लोक निर्माण विभागों और सड़क निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। शिविर में अधोसंरचना विकास, तकनीक, नवाचार, गुणवत्ता नियंत्रण, सड़क सुरक्षा और परियोजनाओं की निगरानी पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। चिंतन शिविर में भाग लेने आए लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह की सोमवार सुबह सबसे पहले लौह पुरुष भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल जी की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ के दर्शन किए एवं सरदार पटेल जी के श्रीचरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया।

सड़कें,  सरकारी भवन और पुल जियो-टैग

लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह ने बताया कि गांधीनगर स्थित भास्कराचार्य संस्थान (BISAG-N) के सहयोग से पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर मध्यप्रदेश के लिए लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल एप विकसित किया गया है। इसके माध्यम से प्रदेश की 74,370 किलोमीटर सड़कों, 2,601 सरकारी भवनों और 3,654 पुलों को जियो-टैग किया जा चुका है। इससे अधोसंरचना संबंधी जानकारी को सटीक भौगोलिक पहचान के साथ उपलब्ध कराने में मदद मिली है।प्रदेश ने रोड नेटवर्क मास्टर प्लान मॉड्यूल भी विकसित किया है। पीएम गति शक्ति के भू-स्थानिक डेटा का उपयोग कर तैयार रोड नेटवर्क मास्टर प्लान से मौजूदा सड़क नेटवर्क, क्षेत्रीय आवश्यकताओं और भविष्य की प्राथमिकताओं का बेहतर विश्लेषण संभव हुआ है।

डीपीआर, बजट और समय-सीमा निर्धारण से जुड़ा पीएम गति शक्ति

श्री सिंह ने बताया कि प्रस्तावित सड़कों के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया को भू-स्थानिक डेटा से जोड़ने के लिए डीपीआर मॉड्यूल विकसित किया गया है। इसी प्रकार बजट मॉड्यूल के माध्यम से वार्षिक बजट तैयार करने की प्रक्रिया को पीएम गति शक्ति से जोड़ा गया है। विभिन्न प्रस्तावों और योजनाओं को एक साथ देखने से संभावित दोहराव की पहचान करने और उसे दूर करने में मदद मिल रही है। इससे उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग का आधार तैयार हुआ है।निर्माण कार्यों के लिए विकसित टाइमलाइन मॉड्यूल से परियोजनाओं की वास्तविक समय-सीमा निर्धारित करने और तय समय-सीमा के अनुरूप प्रगति की समीक्षा करने की व्यवस्था की गई है। इस प्रकार सर्वेक्षण और डेटा संग्रह से लेकर योजना, डीपीआर, बजट तथा निर्माण की समय-सीमा तक पीएम गति शक्ति को विभागीय कार्यप्रणाली से जोड़ा जा रहा लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि पीएम गति शक्ति की क्षमताओं का उपयोग परियोजना क्रियान्वयन, प्रगति की निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और अनुबंध प्रबंधन तक बढ़ाया जाना चाहिए। विभागों की व्यावहारिक आवश्यकताओं के अनुसार नए मॉड्यूल, इंटरफेस और सुविधाएं विकसित करने के लिए BISAG-N के साथ और अधिक समन्वय किया जा सकता है।श्री सिंह ने राज्यों से अपनी तकनीकी चुनौतियों, आवश्यकताओं और संभावनाओं पर खुले मन से चर्चा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पीएम गति शक्ति पर डेटा अपलोड करने के साथ उसका नियमित निर्णयों और कार्यों में उपयोग आवश्यक है। सत्र से नए विचार, व्यावहारिक सुझाव और सार्थक समाधान सामने आना ही चिंतन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।

मध्यप्रदेश की पहल को BISAG-N ने सराहा, अन्य राज्यों में भी अपनाए जा रहे नवाचार

BISAG-N के निदेशक  विनय ठाकुर ने पीएम गति शक्ति की विभिन्न सुविधाओं और निर्माण कार्यों में इसके उपयोग की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल की है। श्री सिंह स्वयं तीन-चार बार BISAG-N, गांधीनगर पहुंचकर कार्यों की समीक्षा और मार्गदर्शन कर चुके हैं।

श्री ठाकुर ने बताया कि राजस्थान, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मध्यप्रदेश के कुछ नवाचारों को लागू किया गया है। उन्होंने इसे राज्यों के बीच सफल प्रयोगों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।

सफल नवाचारों को साझा कर अन्य राज्यों में अपनाएं : श्री गडकरी

चिंतन शिविर के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने देशभर के अच्छे प्रयोगों और नवाचारों को साझा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘बैंक ऑफ आइडियाज, इनोवेशन एंड रिसर्च’ जैसी वेबसाइट बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी राज्य या विभाग में सफल हुए प्रयोगों को दूसरे राज्यों में भी अपनाया जाना चाहिए, जिससे उनके अनुभवों का व्यापक लाभ मिल सके।

श्री गडकरी ने भूमि अधिग्रहण को सड़क परियोजनाओं की प्रमुख चुनौती बताते हुए कहा कि लगभग 1.60 लाख भूमि अधिग्रहण प्रकरण लंबित हैं। उन्होंने टेंडर जारी करने से पहले भूमि अधिग्रहण संबंधी कार्रवाई पूरी करने का सुझाव दिया, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी से बचा जा सके।सड़क सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं में 18 से 36 वर्ष के युवाओं की बड़ी संख्या में मृत्यु देश के लिए गंभीर क्षति है। उन्होंने बताया कि लगभग 40 प्रतिशत दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों और 60 प्रतिशत राज्य सरकारों की सड़कों पर होती हैं। उन्होंने व्हाइट टॉपिंग तथा अल्ट्रा हाई परफॉर्मेंस फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट जैसी तकनीकों के उपयोग पर भी विचार करने का सुझाव दिया।

ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से परियोजनाओं की निगरानी पर चर्चा

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के चेयरमैन श्री संतोष यादव ने ड्रोन तकनीक से सड़क परियोजनाओं की निगरानी और विश्लेषण की जानकारी दी। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से निर्माण कार्यों में संभावित देरी और लागत वृद्धि का पूर्व आकलन करने तथा एनएचएआई के डेटा लेक सिस्टम के उपयोग के बारे में बताया।शिविर में अमरावती शहर के निर्माण और विकास पर भी प्रस्तुतीकरण हुआ। इसमें आधुनिक तकनीक, भू-स्थानिक डेटा और एकीकृत अधोसंरचना योजना के माध्यम से बड़े एवं जटिल विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की संभावनाएं प्रस्तुत की गईं।