.. जबलपुर के गढ़ा थाना क्षेत्र में सड़क ने एक बेटी की जिंदगी निगल ली। 24 वर्षीय टीचर दीक्षा गुप्ता, जो शाही तलाव स्थित रॉयल स्कूल में मासूम बच्चों के भविष्य गढ़ रही थीं, खुद अपनी जिंदगी की आखिरी घड़ी से बेखबर थीं। कोचिंग पढ़ाकर, हनुमान मंदिर में माथा टेककर जब वे स्कूटी से घर लौट रही थीं, तभी सरेआम कानून को ठेंगा दिखाते हुए एक बेलगाम हाइवा डंपर मौत बनकर उन पर टूट पड़ा। पलक झपकते ही सड़क खून से लाल हो गई और एक जिंदगी हमेशा के लिए खामोश हो गई। नो एंट्री का बोर्ड लगा था चौराहे पर, फिर कैसे घुस आया डंपर रास्ते पर?— यही सवाल अब हर जुबान पर है। प्रशासन की लापरवाही और मिलीभगत का यह जीता-जागता सबूत है कि बिना नंबर प्लेट के दैत्याकार वाहन बेखौफ सड़कों को रौंदते फिरते हैं, और जिम्मेदार महकमा आंख मूंदे बैठा रहता है। स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है — संजीवनी नगर-गढ़ा क्षेत्र में शराब दुकानों के इर्द-गिर्द रोज लगने वाला जाम, बेतरतीब खड़े वाहन, और बेलगाम ट्रैफिक — यह सब मिलकर मौत का सामान तैयार करते रहे और प्रशासन तमाशबीन बना रहा। घटना के बाद गढ़ा पुलिस ने आरोपी चालक को हिरासत में लेकर डंपर जब्त तो कर लिया, मगर सवाल सिर्फ एक चालक का नहीं — नो एंट्री तोड़ने की हिम्मत किसने दी, बिना नंबर वाहन किसकी शह पर दौड़ रहे थे, इसका जवाब पूरे तंत्र को देना होगा। जनता की मांग है कि दीक्षा गुप्ता की मौत को महज एक “हादसा” कहकर फाइल बंद न की जाए, बल्कि लापरवाह अफसरों और वाहन मालिकों पर भी सख्त कार्रवाई हो, ताकि किसी और मां-बाप की गोद यूं ही खाली न हो।