जबलपुर। नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के पशु सर्जरी, चिकित्सा एवं रेडियोलॉजी विभाग तथा मध्यप्रदेश शासन के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 21 से 23 जुलाई 2026 तक एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सर्जरी विषय पर तीन दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य मैदानी स्तर पर कार्यरत पशु चिकित्सकों को आधुनिक शल्य चिकित्सा तकनीकों का व्यावहारिक (हैंड्स-ऑन) प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी सर्जिकल दक्षता को और अधिक प्रभावी बनाना था।प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 10 पशु चिकित्सकों ने भाग लिया। इस दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ओवेरियोहिस्टेरेक्टॉमी, कैस्ट्रेशन, सिजेरियन सेक्शन, पायोमेट्रा सर्जरी, स्क्रोटल एब्लेशन तथा ट्यूमर निष्कासन सहित कुल 10 सफल शल्य प्रक्रियाएं संपन्न कीं।
विशेषज्ञों ने बताया कि नर पशुओं में समय पर कैस्ट्रेशन किए जाने से पेरिनियल हर्निया एवं प्रोस्टेट संबंधी रोगों की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। साथ ही, एबीसी कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक एवं विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) मनदीप शर्मा ने सफल आयोजन के लिए विभाग एवं सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पशु चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ पशु कल्याण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. गिरधारी दास ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण मैदानी स्तर पर कार्यरत पशु चिकित्सकों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं और उनकी शल्य चिकित्सा संबंधी दक्षता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. रणधीर सिंह ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि कार्यक्रम में प्रतिभागियों को आधुनिक शल्य तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया, जिससे वे अपने कार्यक्षेत्र में अधिक दक्षता के साथ सेवाएं दे सकेंगे।कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. अपरा शाही, डॉ. बबीता दास, डॉ. अपूर्वा मिश्रा सहित विभाग के अन्य संकाय सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। अंत में डॉ. बबीता दास ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया