400 करोड़ का पुल, तीन साल भी नहीं चल पाया, भाजपा विधायक विश्नोई अब अपनी ही सरकार पर हमलावर


जबलपुर। करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बना नेशनल हाईवे 45 पर शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज आखिर तीन साल भी नहीं टिक पाया। एक के बाद एक दोनों लेन क्षतिग्रस्त होने के बाद पुल बंद है, भारी वाहनों का दबाव पाटन मार्ग पर आ गया है और सड़क हादसों का सिलसिला बढ़ गया है। लेकिन अब सवाल सिर्फ पुल की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि सरकारी जवाबदेही और राजनीतिक खींचतान का भी है। हैरानी की बात यह है कि विपक्ष नहीं, बल्कि भाजपा के ही वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई अपनी सरकार और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के प्लेटफार्म एक्स से लेकर मुख्यमंत्री तक यह मुद्दा उठाकर सरकार की कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं।
विधायक अजय विश्नोई ने आरोप लगाया है कि शहपुरा पुल पिछले कई महीनों से बंद है, लेकिन सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। भारी वाहनों को पाटन-जबलपुर मार्ग पर मोड़ दिया गया, जिससे सड़कें बदहाल हो गईं और दुर्घटनाओं में लोगों की जान जाने लगी। उनका दावा है कि जबलपुर-पाटन सड़क चौड़ीकरण का प्रस्ताव बजट में शामिल होने के बावजूद फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया, क्योंकि यह लोक निर्माण विभाग की प्राथमिकताओं में ही नहीं है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए विधायक ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर पाटन-जबलपुर और पाटन-मानकेड़ी सड़क निर्माण तत्काल शुरू कराने की मांग की है।
इधर, पुल निर्माण में बरती गई कथित लापरवाही पर मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) ने भी बड़ी कार्रवाई की है। जांच में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक और संभागीय प्रबंधक की पेंशन रोकने की अनुशंसा कर दी गई है। यह कार्रवाई इस ओर इशारा करती है कि करोड़ों रुपये की परियोजना में गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 400 करोड़ रुपये का पुल तीन साल में ही जवाब दे गया, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या कार्रवाई केवल अधिकारियों तक सीमित रहेगी या निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार ठेकेदारों की जवाबदेही भी तय होगी?