“गांधीजी, जबलपुर को बचाइए…!”शहर के घटते कद पर टाउन हॉल में मौन पुकार आज


जबलपुर। कभी महाकौशल की राजधानी और प्रशासनिक, शैक्षणिक तथा औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा जबलपुर अब अपने संस्थानों के लगातार हो रहे विखंडन और उपेक्षा को लेकर फिर चर्चा में है। इसी मुद्दे को प्रतीकात्मक और व्यंग्यात्मक अंदाज में उठाने के लिए शहर के जागरूक नागरिकों ने 25 जुलाई को दोपहर 1 बजे टाउन हॉल परिसर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष मौन प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया है। प्रदर्शन का शीर्षक रखा गया है— “गांधीजी, जबलपुर को बचाइए…!”
आयोजकों की ओर से नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ.पीजी नाजपांडे ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में जबलपुर से कई महत्वपूर्ण संस्थानों का महत्व कम हुआ है या उनका विभाजन किया गया है। उनका आरोप है कि हाल के वर्षों में मेडिकल यूनिवर्सिटी सहित कई संस्थाओं के विखंडन और प्रशासनिक फैसलों ने शहर की पहचान और प्रतिष्ठा को प्रभावित किया है। उनका मानना है कि जिस जबलपुर को कभी प्रदेश के प्रमुख प्रशासनिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में देखा जाता था, आज उसका प्रभाव लगातार सिमटता जा रहा है।
इसी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने किसी राजनीतिक मंच के बजाय महात्मा गांधी की प्रतिमा को चुना है। उनका कहना है कि अब ऐसा महसूस होने लगा है कि जबलपुर की आवाज उठाने वाला कोई प्रभावी नेतृत्व नहीं बचा है, इसलिए शहर की अस्मिता बचाने की प्रतीकात्मक गुहार गांधीजी से लगाई जा रही है।
आयोजकों के अनुसार यह प्रदर्शन किसी दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उन नीतियों के विरोध में है जिनके कारण जबलपुर का महत्व लगातार घटता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में शहर से और भी महत्वपूर्ण संस्थान या अधिकार छिन सकते हैं।
इस मौन प्रदर्शन के जरिए नागरिक सरकार और जनप्रतिनिधियों का ध्यान जबलपुर के साथ कथित उपेक्षा और भेदभाव की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। आयोजकों ने शहरवासियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में शामिल होकर जबलपुर की पहचान, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी एकजुटता दर्ज कराएं।