मंडला। कृषि भूमि के नामांतरण आदेश के एवज में रिश्वत मांगने की शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस ने गुरुवार को उप तहसील बम्हनी बंजर के कार्यालय परिसर में ट्रैप कार्रवाई की। लोकायुक्त टीम ने 8 हजार रुपये की रिश्वत लेते प्राइवेट व्यक्ति हरीश सिंगौर को रंगेहाथ पकड़ लिया। मामले में नायब तहसीलदार अजय श्रीवास्तव की भूमिका की भी जांच की जा रही है।लोकायुक्त के अनुसार ग्राम सिल्गी, जिला मंडला निवासी रोहणी प्रसाद चंद्रौल ने शिकायत की थी कि उनके पिता झनक लाल के नाम दर्ज कृषि भूमि वसीयतनामा के माध्यम से उनके बेटे आलोक चंद्रौल के नाम की गई है। भूमि के नामांतरण के लिए उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया था।आवेदक जब नामांतरण की प्रक्रिया के संबंध में उप तहसील बम्हनी बंजर कार्यालय पहुंचा तो आरोप है कि वहां पदस्थ नायब तहसीलदार अजय श्रीवास्तव और उनके बाबू के रूप में काम कर रहे प्राइवेट व्यक्ति हरीश सिंगौर ने नामांतरण आदेश करने के बदले 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।रिश्वत की मांग से परेशान आवेदक ने लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय जबलपुर में शिकायत की। शिकायत का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान आरोपी पक्ष कथित तौर पर 8 हजार रुपये लेने के लिए तैयार हुआ।इसके बाद लोकायुक्त टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। गुरुवार 17 सितंबर को आवेदक द्वारा रिश्वत की रकम दिए जाने के दौरान हरीश सिंगौर को 8 हजार रुपये लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया गया।लोकायुक्त पुलिस ने मामले में नायब तहसीलदार अजय श्रीवास्तव और हरीश सिंगौर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 13(1)(B), 13(2) तथा धारा 61(2) बीएनएस के तहत कार्रवाई की जा रही है। प्रकरण में नायब तहसीलदार की भूमिका और रिश्वत की मांग से उनके कथित संबंधों की जांच की जा रही है।कार्रवाई लोकायुक्त संगठन के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में टीएलओ निरीक्षक शशि कला मुस्कुले, निरीक्षक राहुल गजभिए, निरीक्षक जितेंद्र यादव एवं लोकायुक्त जबलपुर के दल द्वारा की गई।