धुआंधार में जान जोखिम में डाल रहे बच्चे, तेज बहाव के बीच लगा रहे छलांग

जबलपुर। विश्वप्रसिद्ध संगमरमर की चट्टानों से घिरे भेड़ाघाट के धुआंधार जलप्रपात में इन दिनों नर्मदा का जलस्तर और बहाव बेहद तेज है। बारिश के पानी की अधिकता से धुआंधार ओवरफ्लो हो रहा है और फॉल प्वाइंट के बाहर तक नदी की तेज लहरें दिखाई दे रही हैं। ऐसे खतरनाक हालात के बीच बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर तेज बहाव में छलांग लगा रहे हैं और पानी के बीच से रेम्प तक पहुंच रहे हैं।सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस स्थान पर पहले भी डूबने और हादसों में कई लोगों की जान जा चुकी है, वहां पर्यटकों की निगरानी और सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आ रहे। मौके पर चेतावनी बोर्ड भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में बारिश के दौरान धुआंधार घूमने पहुंच रहे पर्यटकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।धुआंधार में रेम्प और पहाड़ी के बीच सड़क तक लोगों की आवाजाही बनी हुई है। सड़क और रेम्प के बीच पानी का तेज बहाव है, इसके बावजूद बच्चे बेखौफ होकर पानी में छलांग लगा रहे हैं। छलांग लगाने के बाद वे रेम्प तक पहुंच रहे हैं, जबकि इसी रेम्प से सटा हुआ जलप्रपात है। जरा सी चूक या तेज लहर का झटका गंभीर हादसे में बदल सकता है।बारिश के मौसम में नर्मदा के तेज बहाव को देखते हुए लोगों को पानी से दूर रखने के लिए भेड़ाघाट नगर पंचायत की ओर से चेतावनी बोर्ड लगाए जाते हैं। संवेदनशील स्थानों पर तार की बाड़ और बैरिकेड्स भी लगाए जाते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में कई स्थानों पर ये सुरक्षा व्यवस्थाएं नजर नहीं आ रही हैं।ऐसे में सवाल यह है कि जब धुआंधार में पानी का बहाव खतरनाक स्तर पर है, तो पर्यटकों को संवेदनशील हिस्सों से दूर रखने के लिए स्थायी और प्रभावी निगरानी क्यों नहीं दिखाई दे रही? हादसा होने के बाद इंतजाम करने के बजाय प्रशासन पहले से सतर्क क्यों नहीं है?भेड़ाघाट थाना प्रभारी कमलेश चौरिया ने बताया कि धुआंधार में पेट्रोलिंग टीम लगातार गश्त करती है और खतरनाक स्थानों से लोगों को दूर रखा जाता है। नगर पालिका की ओर से अनाउंसमेंट भी कराया जाता है। उन्होंने कहा कि पानी में कोलाहल करने वाले बच्चे स्थानीय हैं और उन्हें वहां से हटाया जाएगा।फिलहाल धुआंधार में तेज बहाव के बीच बच्चों की यह लापरवाही प्रशासन और स्थानीय निकाय के लिए चेतावनी है। सवाल सिर्फ बच्चों की जान जोखिम में डालने का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का भी है जो खतरे को सामने देखते हुए भी हर व्यक्ति तक सुरक्षा की चेतावनी और निगरानी सुनिश्चित नहीं कर पा रही।