यूपीआई पर प्रस्तावित एमडीआर को लेकर व्यापारियों में चिंता,कैट ने पुनर्विचार की मांग की

जबलपुर /केंद्र सरकार द्वारा यूपीआई भुगतान व्यवस्था में किए गए नए प्रावधानों के तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यक्ति से व्यापारी (P2M) लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किया जाना प्रस्तावित है। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर एमडीआर अधिकतम ₹300 प्रति लेन-देन तक सीमित रहेगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने की जानकारी दी गई है। इस व्यवस्था को लेकर कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट), मध्यप्रदेश ने व्यापारियों के हित में पुनर्विचार की मांग की है। कैट का कहना है कि यूपीआई आज छोटे-बड़े व्यापारियों के लिए भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है और विशेषकर कम लाभांश पर कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए भुगतान लागत में किसी भी प्रकार की वृद्धि चिंता का विषय है।
कैट मध्यप्रदेश के अध्यक्ष भूपेंद्र जैन अनुसार किराना, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, आभूषण सहित अनेक व्यापारिक क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेन-देन सामान्य हैं। ऐसे में इन लेन-देन पर एमडीआर लागू होने से व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है। व्यापारियों का आग्रह है कि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बनाई गई व्यवस्था में व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का भार न पड़े।कैट ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) यूपीआई भुगतान पूरी तरह निःशुल्क रहेगा, ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर एमडीआर नहीं लगेगा तथा निर्धारित श्रेणी में आने वाले छोटे व्यापारियों को भी शून्य एमडीआर की सुविधा जारी रहेगी। सरकार के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी यूपीआई लेन-देन इस एमडीआर व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे। कैट का कहना है कि इन प्रावधानों के बावजूद जिन व्यापारियों के ₹2,000 से अधिक के नियमित यूपीआई लेन-देन होते हैं, उनके लिए यह अतिरिक्त लागत महत्वपूर्ण हो सकती है। इसलिए केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय को व्यापारी संगठनों के साथ संवाद कर इस व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।
कैट मध्यप्रदेश ने प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय वित्त मंत्री से आग्रह किया है कि व्यापारियों, विशेषकर छोटे एवं मध्यम कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए ₹2,000 से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित एमडीआर की पुनः समीक्षा की जाए और ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे डिजिटल भुगतान की सुविधा भी बनी रहे तथा व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार भी न पड़े।कैट ने कहा कि देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में व्यापारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए व्यापारी और सरकार के बीच संवाद के माध्यम से ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जो डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ व्यापारियों के हितों की भी रक्षा करे।