*नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुक्रवार से राजधानी के भारत मंडपम, प्रगति मैदान में शुरू हो रहा है, जिसका मुख्य नेता-सत्र 12 और 13 सितंबर को होगा। भारत ने जनवरी 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी और इस वर्ष की थीम “बिल्डिंग फॉर रेज़िलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” रखी गई है। बीस साल पहले शुरू हुए इस मंच के लिए यह आयोजन भारत की चौथी मेज़बानी है।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर कड़ी की गई है। करीब 25 हज़ार सुरक्षाकर्मी और 100 से अधिक एनएसजी कमांडो तैनात किए गए हैं, जबकि 11 होटलों को अति-सुरक्षा घेरे में रखा गया है और विदेशी नेताओं की आवाजाही के लिए 35 अलग रूट तय किए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने 35 से अधिक सड़कों पर नियंत्रण और 22 डायवर्ज़न प्वाइंट लागू किए हैं, साथ ही नियंत्रित सड़कों के 200 मीटर दायरे में सड़क किनारे पार्किंग पर भी रोक लगाई गई है। भीड़ कम करने के मद्देनज़र शुक्रवार को दिल्ली के सभी स्कूल बंद रखे गए हैं। [ मुलाकात
सम्मेलन का सबसे बड़ा कूटनीतिक आकर्षण चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा है, जो 2020 के गलवान संघर्ष के बाद उनकी पहली और करीब सात साल में पहली भारत यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग 12 सितंबर को द्विपक्षीय बातचीत करेंगे, जो गलवान झड़प के बाद दोनों नेताओं की भारत में पहली आमने-सामने मुलाकात होगी। इससे पहले सीमा मुद्दे पर एनएसए अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में बातचीत हो चुकी है। [OneIndia](https://www.oneindia.com/india/xi-jinping-to-visit-india-after-7-years-for-brics-summit-what-it-means-for-india-china-ties-8201475.html) [PGurus](https://www.pgurus.com/pm-modi-xi-talks-on-cards-as-chinas-president-returns-to-delhi-after-7-years)
**पुतिन और पेजेश्कियान भी दिल्ली पहुंचे**
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को पालम वायुसेना केंद्र पर उतरकर चाणक्यपुरी स्थित होटल रवाना हुए और मोदी से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी सम्मेलन में शामिल होने पहुंच रहे हैं, ऐसे में ईरान युद्ध और यूक्रेन जंग के बीच समूह की एकजुटता की परीक्षा होगी। [Gulf
**एजेंडे में क्या-क्या और कितने सदस्य देश**
ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन से शुरू हुआ ब्रिक्स अब विस्तार के बाद 11 पूर्ण सदस्यों वाला समूह बन चुका है, जिसमें दक्षिण अफ्रीका, यूएई, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं। दो दिवसीय सम्मेलन में वैश्विक शासन सुधार, व्यापार-निवेश, ऊर्जा व खाद्य सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होगी, साथ ही एक नवाचार प्रदर्शनी, संयुक्त वृक्षारोपण और पीएम मोदी द्वारा रात्रिभोज का आयोजन भी होगा।
**आगे क्या**
विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया संकट पर साझा रुख बनाना भारत के लिए सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौती होगी, जबकि मोदी-शी और मोदी-पुतिन की मुलाकातें इस हफ्ते की सबसे अहम रणनीतिक बातचीत मानी जा रही हैं। सम्मेलन के अंत में जारी होने वाला घोषणा-पत्र यह तय करेगा कि बदलते वैश्विक हालात में ब्रिक्स की साझा आवाज़ कितनी मज़बूत बनकर उभरती है।