आयुध निर्माणियों के 99.51 प्रतिशत कर्मचारियों की निगमीकरण से दूरी, कर्मचारियों ने सरकारी सेवक बने रहने का दिया विकल्प, केवल 123 ने नए रक्षा उपक्रमों में स्थायी संविलियन चुना


जबलपुर। देश की 41 आयुध निर्माणियों में कार्यरत रक्षा असैनिक कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने के पक्ष में अपना स्पष्ट रुख जाहिर किया है। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज़ फेडरेशन (एआईडीईएफ) के अनुसार, कुल 59,318 कर्मचारियों में से 59,033 यानी 99.51 प्रतिशत ने 15 अक्टूबर 2026 तक केंद्र सरकार का कर्मचारी बने रहने का विकल्प चुना। वहीं, सात नए रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों में स्थायी संविलियन के पक्ष में केवल 123 कर्मचारियों ने विकल्प दिया, जबकि 92 कर्मचारी विभिन्न कारणों से अपनी पसंद दर्ज नहीं करा सके।
फेडरेशन के अध्यक्ष एसएन पाठक और महासचिव सी. श्रीकुमार ने इन आंकड़ों को निगमीकरण की नीति के प्रति कर्मचारियों के रुख का संकेत बताया है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों ने अपनी मौजूदा सरकारी सेवा स्थिति बरकरार रखने को प्राथमिकता दी है। फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारी जब तक नए रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों में स्थायी रूप से शामिल होने का विकल्प नहीं चुनते, तब तक वे केंद्र सरकार के कर्मचारी बने रहेंगे।

2021 में हुआ था आयुध निर्माणी बोर्ड का पुनर्गठन……

केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में तत्कालीन आयुध निर्माणी बोर्ड को समाप्त कर सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का गठन किया था। इस फैसले का एआईडीईएफ ने विरोध करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। फेडरेशन के मुताबिक, अदालती कार्यवाही के दौरान सरकार ने लिखित आश्वासन दिया था कि मौजूदा रक्षा असैनिक कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारी बने रहेंगे और नए निगमों में उनकी तैनाती प्रतिनियुक्ति के आधार पर होगी। स्थायी संविलियन के लिए कर्मचारियों को स्वयं विकल्प देना था।

विकल्प चयन की अधिसूचना के बाद सामने आए आंकड़े……..

कर्मचारियों से उनकी पसंद जानने के लिए 15 जून 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई थी। इसके तहत उन्हें केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने अथवा सात नए रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों में स्थायी रूप से शामिल होने का विकल्प दिया गया था। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद जारी आंकड़ों में सरकारी सेवा में बने रहने का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों की संख्या सर्वाधिक रही।
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने देशभर के रक्षा असैनिक कर्मचारियों को इस फैसले के लिए बधाई देते हुए केंद्र सरकार से उनकी भावनाओं का सम्मान करने की अपील की है। संगठन ने मांग की है कि कर्मचारियों की वैधानिक सेवा स्थिति और केंद्र सरकार के कर्मचारी के रूप में उनके अधिकार सुरक्षित रखे जाएं।