15 लाख के भुगतान के एवज में 2 लाख की रिश्वत लेते सीएमओ ट्रेप

मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर पालिका परिषद मंडला के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) गजानन नाफड़े को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। कार्रवाई 25 सितंबर 2026 को नगर पालिका कार्यालय में की गई। आरोपी सीएमओ के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।लोकायुक्त के अनुसार, जबलपुर निवासी 57 वर्षीय ज्ञानचंद बेन ने शिकायत की थी कि वह और उनकी पत्नी मंजू बेन शासकीय पंजीकृत ठेकेदार हैं। उनकी पत्नी के नाम से एमएस पलक बेन फर्म पंजीकृत है। फर्म को नगर पालिका मंडला में वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में एलईडी लाइट और फिटकरी सप्लाई का ठेका मिला था। वहीं शिकायतकर्ता को पाइप जॉइंट और वाटर कूलर सप्लाई का काम मिला था।शिकायतकर्ता के मुताबिक, उनकी पत्नी के कार्य का करीब 3 लाख 92 हजार 300 रुपये का भुगतान हो चुका था। इसके बाद जब वह अपने कार्य से संबंधित करीब 15 लाख रुपये के भुगतान के लिए सीएमओ गजानन नाफड़े से मिले तो कथित तौर पर उनसे रिश्वत की मांग की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सीएमओ ने उनकी पत्नी के पूर्व भुगतान का 12 प्रतिशत बतौर रिश्वत मांगते हुए भुगतान करने की बात कही।शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस जबलपुर ने मामले का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग की पुष्टि होने पर आरोपी सीएमओ ने 2 लाख रुपये लेने की सहमति दी। इसके बाद लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाया।25 सितंबर को नगर पालिका कार्यालय में ट्रेप की कार्रवाई के दौरान गजानन नाफड़े को 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया गया। कार्रवाई पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त मध्यप्रदेश भोपाल योगेश देशमुख के निर्देशन तथा पुलिस उप महानिरीक्षक लोकायुक्त मनोज सिंह के नेतृत्व में की गई।ट्रेप दल में टीएलओ निरीक्षक राहुल गजभिए, निरीक्षक जितेंद्र यादव, निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया सहित लोकायुक्त जबलपुर का दल शामिल रहा।लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 13(1)(बी) और 13(2) के तहत कार्रवाई शुरू की है।