जबलपुर। डॉक्टरों के खिलाफ कथित चिकित्सकीय लापरवाही यानी Medical Negligence के मामलों में सीधे आपराधिक कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ जांच की व्यवस्था लागू नहीं किए जाने पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद मध्यप्रदेश में जिला स्तर पर मेडिकल एक्सपर्ट बोर्ड गठित नहीं किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने अनावेदकों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), सागर की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है।
IMA सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2005 में Jacob Mathew बनाम State of Punjab मामले में चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनका उद्देश्य डॉक्टरों के खिलाफ महज शिकायत के आधार पर तत्काल आपराधिक कार्रवाई को रोकना और पहले योग्य मेडिकल विशेषज्ञों से आरोपों की प्रारंभिक जांच कराना था।याचिका के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की इस व्यवस्था के अनुरूप मध्यप्रदेश में जिला स्तर पर मेडिकल एक्सपर्ट बोर्ड गठित किया जाना अपेक्षित था, लेकिन अब तक इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क है कि मेडिकल नेग्लीजेंस का मामला सामान्य आपराधिक शिकायत से अलग प्रकृति का होता है। किसी चिकित्सक के उपचार को लापरवाही मानने से पहले यह निर्धारित करना जरूरी है कि संबंधित चिकित्सा प्रक्रिया में वास्तव में निर्धारित मानकों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।इसीलिए Jacob Mathew मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चिकित्सकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई से पहले सक्षम और स्वतंत्र मेडिकल विशेषज्ञ की राय को महत्वपूर्ण माना था। याचिका में इसी व्यवस्था को मध्यप्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किए जाने की मांग की गई है।जनहित याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बगरेचा, जितेन्द्र कुमार तिवारी और दिव्यांशु देव ने पक्ष रखा। दलीलों पर विचार करने के बाद डिवीजन बेंच ने केंद्र एवं राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
क्या है Jacob Mathew फैसला?
वर्ष 2005 के Jacob Mathew बनाम State of Punjab फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने चिकित्सकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के लिए सुरक्षा कवच से जुड़ी महत्वपूर्ण व्यवस्था निर्धारित की थी। अदालत ने इस बात पर जोर दिया था कि डॉक्टर के खिलाफ केवल शिकायत के आधार पर जल्दबाजी में FIR, गिरफ्तारी या आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। कथित चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की पहले योग्य विशेषज्ञ से प्रारंभिक जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मामला प्रथमदृष्टया मेडिकल नेग्लीजेंस का बनता है या नहीं।