जबलपुर। वन्यजीव संरक्षण और मानवीय संवेदनशीलता की एक प्रेरणादायक मिसाल जबलपुर में देखने को मिली। भोपाल से कटनी जा रहे पांच युवकों ने सड़क किनारे घायल अवस्था में मिले दुर्लभ सींगधारी उल्लू (ब्राउन फिश आउल) को नजरअंदाज करने के बजाय कई किलोमीटर का सफर तय कर रात 11 बजे जबलपुर स्थित पशु चिकित्सा परिसर पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने तत्काल उसका उपचार शुरू किया।नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) मंदीप शर्मा के मार्गदर्शन में संचालित पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय तथा स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ, फॉरेंसिक एंड हेल्थ की टीम ने घायल पक्षी को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई।
हिरण रिवर व्यू प्वाइंट के पास मिला घायल उल्लू
जानकारी के अनुसार भोपाल से कटनी जा रहे आयुष चौकसे, चेतन बंसल, आकाश पांडेय, नीलेश श्रीवास्तव और संदीप यादव को छोटी विक्रमपुर स्थित हिरण रिवर व्यू प्वाइंट के पास सड़क किनारे एक घायल उल्लू मिला। युवकों ने मानवता का परिचय देते हुए उसे वहीं छोड़ने के बजाय सुरक्षित अपने साथ लिया और सीधे जबलपुर स्थित साउथ सिविल लाइंस के पशु चिकित्सा परिसर पहुंचे।
देर रात शुरू हुआ इलाज
अस्पताल अधीक्षक डॉ. रणबीर सिंह जाटव ने सूचना मिलते ही तत्काल उपचार की व्यवस्था कराई। स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ, फॉरेंसिक एंड हेल्थ की संचालक डॉ. शोभा जावरे के निर्देश पर डॉ. सारंग, डॉ. चिन्मय दास और डॉ. जोएल की टीम ने घायल पक्षी का प्राथमिक उपचार किया और उसे सुरक्षित निगरानी में रखा।
चिकित्सकीय जांच में उल्लू के पंख और पैर की हड्डियों में फ्रैक्चर पाया गया। चिकित्सकों के अनुसार आवश्यक शल्यक्रिया कर हड्डियों को पिन की सहायता से स्थिर किया जाएगा। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद पक्षी को नियमानुसार वन विभाग को सौंप दिया जाएगा।
दुर्लभ प्रजाति का है सींगधारी उल्लू
घायल पक्षी की पहचान भूरे मछलीभक्षी उल्लू (Brown Fish Owl – Ketupa zeylonensis) के रूप में हुई है। इसकी सुनहरी आंखें, सिर पर सींग जैसे पंखों के गुच्छे, गहरा भूरा शरीर और शक्तिशाली पंजे इसकी विशेष पहचान हैं। यह प्रजाति सामान्यतः नदियों, तालाबों, झीलों और अन्य जलस्रोतों के आसपास पाई जाती है तथा मछलियों, मेंढकों, केकड़ों और अन्य जलीय जीवों का शिकार करती है। अंधविश्वास के कारण होने वाला अवैध शिकार इसके संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।
युवकों की पहल बनी प्रेरणा
पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एस.एस. तोमर ने घायल वन्यजीव को समय पर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने वाले सभी युवकों की सराहना करते हुए कहा कि वन्यजीवों के प्रति ऐसी संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि यदि कहीं कोई घायल वन्यजीव दिखाई दे तो उसे असहाय छोड़ने के बजाय वन विभाग या अधिकृत रेस्क्यू टीम से तत्काल संपर्क करें।इस घटना ने यह साबित कर दिया कि थोड़ी-सी संवेदनशीलता और समय पर उठाया गया कदम किसी बेजुबान की जिंदगी बचा सकता है।