चाकूबाजी के घायल को बिना इलाज मेडिकल भेजा, ; शिकायत पर सीएमएचओ ने आश्वासन दिया, फिर फोन कर लिया

जबलपुर। शहर की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर रविवार रात एक ऐसी घटना ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए, जिसने “गोल्डन ऑवर” में इलाज की पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। आरोप है कि चाकूबाजी में घायल एक युवक को उपचार के लिए विक्टोरिया अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां न तो उसका प्राथमिक उपचार किया गया और न ही पुलिस कार्रवाई के लिए आवश्यक मुलाहजा रिपोर्ट बनाई गई। अस्पताल से उसे यह कहकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया कि ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर उपलब्ध नहीं है।परिजन घायल को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो वहां भी उन्हें करीब दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। बताया गया कि पहले मुलाहजा रिपोर्ट होनी चाहिए। इस तरह घायल युवक इलाज और कानूनी प्रक्रिया के बीच भटकता रहा, जबकि हर मिनट उसकी जान पर भारी पड़ सकता था।

घटना की जानकारी जब जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवीन कोठारी को दी गई तो उन्होंने मामले की जानकारी लेकर कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन कुछ ही देर बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया। इससे यह सवाल और गहरा गया कि यदि आपात स्थिति में जिले का शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी भी उपलब्ध नहीं है, तो आम नागरिक अपनी शिकायत किससे करे?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विक्टोरिया अस्पताल में रात के समय गंभीर मरीजों को इलाज देने के बजाय अक्सर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल एक अस्पताल की कार्यप्रणाली का मामला नहीं, बल्कि पूरे आपातकालीन स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही का प्रश्न है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रात में किसी व्यक्ति पर हमला हो जाए, सड़क दुर्घटना हो जाए या तत्काल ऑपरेशन की जरूरत पड़ जाए, तो आखिर जबलपुर का नागरिक किस सरकारी अस्पताल पर भरोसा करे? करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई स्वास्थ्य व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों को तत्काल उपचार देना है या उन्हें एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकना हैइस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर हैं। देखना होगा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाता है।