एमपीएमएसयू विखंडन को लेकर जनसंगठनों का प्रदर्शन “जबलपुर के हितों पर मंत्रियों की चुप्पी क्यों…?


जबलपुर। मेडिकल सांईस यूनिवर्सिटी (एमपीएमएसयू) के विभाजन के मुद्दे पर अब जनसंगठनों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने जिला प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा पर जबलपुर के हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए उनसे प्रभारी मंत्री पद छोड़ने की मांग की है। मंच का कहना है कि यदि शहर के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी प्रभारी मंत्री मौन हैं, तो उनके पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। शुक्रवार को यहां घंटाघर में प्रदर्शन के दौरान जनसंगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि मेडिकल यूनिवर्सिटी के विभाजन के मुद्दे पर न केवल प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा, बल्कि महाकौशल क्षेत्र के कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह, राजेंद्र शुक्ल और प्रह्लाद पटेल की चुप्पी ने भी नागरिकों को निराश किया है। संगठनों का आरोप है कि जबलपुर के हितों पर लगातार समझौता किया जा रहा है और जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल साबित हो रहे हैं।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे ने सवाल उठाया कि जब शहर के हितों की रक्षा ही नहीं हो पा रही, तो प्रभारी मंत्री का जबलपुर को क्या लाभ? संगठन का कहना है कि जगदीश देवड़ा को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वयं प्रभारी मंत्री पद से अलग हो जाना चाहिए।

घंटाघर पर प्रदर्शन………

मेडिकल यूनिवर्सिटी के विभाजन के विरोध में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के नेतृत्व में घंटाघर के पास प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर नाराजगी जताते हुए सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
प्रदर्शन में डॉ. पी.जी. नाजपांडे, टी.के. रायचटक, डॉ. एन.बी. श्रीवास्तव, सुशीला कनोजिया, मनीष शर्मा, सुभाष चंद्रा, डॉ. के. सिंह, यशवंत कोष्टा, वेदप्रकाश अवस्थिया, घनश्याम सोनकर, डॉ. आर. लखेरा, अर्जुन कुमार, संतोष श्रीवास्तव, उमा दहिया, मयंक राज, अंकित गौरस्वामी, कुंवर सिंह, बृजेश साहू, अशोक नामदेव, मोहन श्रीवास्तव, माया कुशवाहा, हीरालाल कुशवाहा, प्रफुल्ल सबलेगा, रफीक कामरेड और रियाज कामरेड सहित बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
अब यह मुद्दा केवल मेडिकल यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जबलपुर के राजनीतिक नेतृत्व की जवाबदेही और शहर के हितों की लड़ाई का प्रतीक बनता जा रहा है।