जबलपुर। शहर में सोमवार को हरतालिका व्रत (तीजा) और गणेशोत्सव पर्व पूरी उमंग और उल्लास के साथ आस्था पूर्वक मनाया गया| इस साल कई वर्षों बाद हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन मनाई गई। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पीएल गौतमाचार्य ने बताया कि इस दिन चित्रा नक्षत्र, रवियोग तथा शुभ-शुक्ल योग का दुर्लभ मेल बन रहा है, जिस कारण सामान्य दस दिनों की बजाय उत्सव इस बार बारह दिन तक मनाया जाएगा।
घर-घर विराजे बुद्धि विनायक गणपति बप्पा………
विघ्न विनाशक बुद्धि विनायक प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव का 12 दिवसीय महापर्व सोमवार को गणेश चतुर्थी के साथ प्रारंभ हो गया। ‘‘गणपत्ति बप्पा मोरया, जय गणेश-जय गणेश’’ के उदघोष के साथ घर-घर में बुद्धि विनायक रिद्धि सिद्धि के दाता भगवान गणेश की पूजा अर्चना कर स्थापना की गई।
कल सुबह से ही बाजार गुलजार रहे। पूजन सामग्री और गणेश प्रतिमाओं की खरीददारी करने के लिये श्रद्धालु बाजारों में उमड़ पड़े। लोगों ने पूजन सामग्री खरीदी और गणेश प्रतिमाओं को लाकर घर में उनकी विधि विधान से स्थापना की। सार्वजनिक गणेश उत्सव समितियों में भी कुछेक स्थानों पर विशाल और भव्य प्रतिमाओं की स्थापना कर दी गई। प्रतिमाओं की स्थापना का यह सिलसिला भाद्रपक्ष की दसवी तिथि तक चलेगा। अनन्त चौदस को प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ गणेश उत्सव पर्व का समापन होगा।
तीजा व्रतधारी महिलाओं ने किया रतजगा…….
हरतालिका (तीजा) का पर्व भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस दिन महिलाएं 24 घंटे तक निर्जला व्रत रखकर रात के चारों पहर भगवान शंकर और माता गौरी पार्वती की पूजन अर्चन किया। रतजगा कर भजन कीर्तन किए गए। महिलाएं जहां पति के दीर्घायु होने की कामना को लेकर यह व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित युवतियां सुयोग्य और मनचाहा पति की कामना को लेकर तीजा का व्रत रखती हैं। पौराणिक मान्यता है कि माता पार्वती ने तीजा का व्रत रखकर भगवान भोले शंकर को पाया।
हरतालिका पर घर-घर फुलेहरा बांधकर गौरा-पार्वती और भोले शंकर की आराधना की गई। चारों पहर हवन-पूजन किया गया। भजन कीर्तन का दौर चलता रहा। महिलाओं ने रात्रि जागरण करने के लिये रात भर गाना-बजाना किया। भोर के पहले पहर शिवालयों में भी व्रतधारी महिलाओं की भीड़ उमड़ी। तड़के चार बजे पूजन अर्चन और हवन किया।