सिवनी| सनब्रिज ग्रुप की बायोएनर्जी शाखा, सनब्रिज बायोएनर्जी लिमिटेड ने मध्य प्रदेश के सिवनी में अपने अनाज आधारित, फ्यूल-ग्रेड इथेनॉल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में कमर्शियल उत्पादन शुरू कर दिया है। इसके साथ कंपनी ने भारत के बायोफ्यूल सेक्टर में सक्रिय रूप से कदम रखा है। यह उसके बायोएनर्जी के सफर का एक अहम पड़ाव भी है। सिवनी प्लांट की उत्पादन क्षमता 300 किलोलीटर प्रति दिन (केएलडी) है और इसकी भंडारण क्षमता 11,000 किलोलीटर है। यह प्लांट लगभग 1,17,560 वर्ग मीटर में फैला है। कंपनी अपने इथेनॉल पोर्टफोलियो को और मजबूत कर रही है। छत्तीसगढ़ के रायपुर में जल्द शुरू होने वाले 400 केएलडी के प्लांट के साथ उसकी कुल क्षमता 700 केएलडी तक पहुंच जाएगी।
सनब्रिज बायोएनर्जी का सिवनी प्लांट इथेनॉल उत्पादन में संसाधनों से ज्यादा से ज्यादा फायदा लेने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स और डिस्टिलर्स कॉर्न ऑयल जैसे सह-उत्पाद भी बनते हैं, जिनका इस्तेमाल मुख्य रूप से पोल्ट्री और मवेशियों के आहार में होता है। प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्लांट में पानी की रिकवरी और दोबारा इस्तेमाल की व्यवस्था भी है, और यहां का संचालन जीरो लिक्विड डिस्चार्ज पर आधारित है।
सनब्रिज ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन अनुज अग्रवाल ने कहा, “हमारे सिवनी प्लांट में इथेनॉल उत्पादन की शुरुआत बायोएनर्जी के क्षेत्र में सनब्रिज की यात्रा का एक अहम कदम है। हमारा फोकस एक ऐसा बायोएनर्जी प्लेटफॉर्म तैयार करने पर है, जिसे बड़े पैमाने पर बढ़ाया जा सके, जो ऊर्जा और संसाधनों की कुशलता को एक साथ लाए और किसानों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सार्थक फायदा पहुंचाए। सिवनी प्लांट से इस यात्रा का आगाज हुआ है। भारत का बायोएनर्जी इकोसिस्टम टिकाऊ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम कर रहा है। इस बदलाव के साथ हमें इस नींव को आगे बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं दिखती हैं।”
सनब्रिज बायोएनर्जी फ्यूल-ग्रेड इथेनॉल बनाने के लिए मक्का और टूटे चावल समेत खराब हो चुके खाद्यान्न का इस्तेमाल करती है। अनाज आधारित यह इथेनॉल उत्पादन इंसानों के खाने लायक न रहे खराब और टूटे चावल को काम में लाकर किसान समुदायों को सहारा देता है।
सनब्रिज ग्रुप ने कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, बायोएनर्जी और सोलर एनर्जी के क्षेत्रों में अपने कारोबार स्थापित किए हैं। ग्रुप का फोकस लंबे समय तक चलने वाले ऐसे कारोबार खड़े करने पर है, जो स्थायी लाभ दें और भारत की बदलती खपत और ऊर्जा जरूरतों के अनुरूप हों।