शूर्पणखा के अपमान से भड़का रावण, छलपूर्वक किया माता सीता का हरण, करुण प्रसंग ने श्रद्धालुओं की आंखें की नम

जबलपुर – श्री रामलीला समिति गढ़ा जबालीपुरम के सिद्ध मंच पर षष्टीपूर्ती 60वें रामलीला महोत्सव के नौवें दिवस शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध एवं माता सीता हरण की हृदयस्पर्शी लीलाओं का भव्य मंचन किया गया। भगवान श्रीराम की दिव्य लीलाओं के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। वहीं, माता सीता के हरण और प्रभु श्रीराम से बिछोह के मार्मिक दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

पंचवटी में भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण के अलौकिक सौंदर्य पर मोहित होकर शूर्पणखा ने विवाह का प्रस्ताव रखा। दोनों भाइयों द्वारा प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने पर उसने क्रोधित होकर माता सीता पर आक्रमण करने का प्रयास किया। इस पर लक्ष्मण जी ने उसकी नाक-कान काटकर उसे दंडित किया। अपमानित शूर्पणखा ने अपने भाई रावण के समक्ष विलाप कर प्रतिशोध की ज्वाला भड़का दी।

खर-दूषण सहित 14 हजार राक्षसों का अंत………..

बहन के अपमान का बदला लेने के लिए खर-दूषण विशाल राक्षसी सेना के साथ श्रीराम से युद्ध करने पहुंचे। भगवान श्रीराम ने अद्भुत पराक्रम का परिचय देते हुए खर-दूषण सहित 14 हजार राक्षसों का संहार कर दिया। राक्षसों के विनाश से क्रोधित रावण ने मारीच की सहायता से स्वर्ण मृग का मायाजाल रचा। स्वर्ण मृग के पीछे श्रीराम के जाने और लक्ष्मण के कुटिया से दूर होने पर रावण साधु का वेश धारण कर पहुंचा और छलपूर्वक माता सीता का हरण कर लिया।

माता सीता की करुण पुकार, रावण के अत्याचार और प्रभु श्रीराम से बिछोह के दृश्यों ने मंच पर ऐसा भावपूर्ण वातावरण निर्मित किया कि उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। इस प्रसंग ने अधर्म, छल और अहंकार के विनाश का संदेश देते हुए दर्शकों को रामकथा के मर्म से जोड़ दिया।

दोहा-चौपाइयों के सस्वर गायन ने बांधा समां……….

निर्देशक राजेश मिश्रा के कुशल मार्गदर्शन में व्यास माधव दुबे एवं सहव्यास राकेश मिश्रा ने मधुर स्वर में रामायण की दोहा-चौपाइयों का सस्वर गायन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रभावशाली संवाद, सजीव अभिनय और प्रसंगानुकूल प्रस्तुतियों ने सिद्ध मंच को भक्तिमय बना दिया। संपूर्ण आयोजन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जयकारों से वातावरण को गुंजायमान करते रहे।

श्रीरामलीला गढ़ा द्वारा संचालित योग साधना केन्द्र देवताल के योग शिक्षक श्री प्रहलाद बिल्थरे और सहायक श्री गनपत कोष्टा का समिति द्वारा सम्मान किया गया।

इस अवसर पर समिति संचालक पंडित अशोक मनोध्याय, अध्यक्ष एवं निर्देशक राजेश मिश्रा, महामंत्री एडवोकेट अरुण दीक्षित, लोकराम कोरी, उमाशंकर मिश्र, संजय तिवारी चेरीताल, रमाशंकर कटारे, हरीश मनोध्याय, अशोक बघेल ‘दादा भाई’, राकेश पाठक, डॉ. नीना भूपेन्द्र उपाध्याय, केदारनाथ शर्मा, भोलाराम खत्री, हनुमंत सिंह रघुवंशी, नीलेश चौबे, देवेन्द्र मनोध्या, श्रीमती इंदुलता, राजेन्द्र प्यासी, विनायक तिवारी, कैलाश नेमा, विजय नेमा, मदन गोपाल पटेल, प्रमोद तिवारी, राजेश नेमा, विनोद नेमा, गणपत कोष्टा, जितेन्द्र सोनी, मदन चौरसिया, रामफल मिश्रा, श्रीमती उर्मिला यादव, श्रीमती छाया मिश्रा, सुधा यादव, नरेश मिश्रा, सम्राट पांडे, श्रीमती विद्या केवट एवं श्रीमती अनीता केवट सहित समिति के स्थायी एवं आजीवन सदस्य उपस्थित रहे।

आज 16 अक्टूबर 2026 शुक्रवार को जटायु मुक्ति, शबरी की नवधा भक्ति, श्रीराम-सुग्रीव मैत्री, बाली वध एवं माता सीता की खोज जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। समिति ने समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में सिद्ध मंच पर पहुंचकर भगवान श्रीराम की दिव्य लीलाओं का दर्शन करने एवं पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।