जबलपुर। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जेएनकेवीवी), जबलपुर के कृषि अभियांत्रिकी संकाय के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं पूर्व अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) अतुल कुमार श्रीवास्तव को कृषि अभियांत्रिकी के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक के उल्लेखनीय योगदान के लिए इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियर्स (आईएसएई), नई दिल्ली के प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट गोल्ड मेडल-2026 से सम्मानित किया गया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित आईएसएई के 60वें वार्षिक सम्मेलन, हीरक जयंती समारोह एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। यह उपलब्धि जबलपुर सहित मध्य प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने में अहम भूमिका
प्रो. श्रीवास्तव ने मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और सरकारी कृषि विभागों के साथ मिलकर आधुनिक कृषि यंत्रीकरण, उन्नत कृषि उपकरणों और कस्टम हायरिंग मॉडल को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों को पहुंचाने और कृषि कार्यों को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिली।
21 पेटेंट और 438 प्रकाशनों का उल्लेखनीय योगदान
कृषि मशीनरी, ट्रैक्टर शक्ति, कृषि यंत्रों की डिजाइन, मानव कार्यक्षमता, मृदा गतिकी, कंप्यूटर आधारित डिजाइन और जैव ईंधन अभियांत्रिकी के क्षेत्र में उनके शोध एवं नवाचारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। उनके नाम 21 स्वीकृत पेटेंट हैं, जिनमें 17 भारतीय और चार जर्मन पेटेंट शामिल हैं। इसके अलावा 10 भारतीय पेटेंट प्रक्रियाधीन हैं।उनके कुल 438 प्रकाशनों में 293 शोध पत्र, 17 पुस्तकें, 15 पुस्तक अध्याय, नौ तकनीकी मैनुअल, 25 तकनीकी बुलेटिन और 25 लोकप्रिय एवं अन्य लेख शामिल हैं। कृषि अभियांत्रिकी के क्षेत्र में उनका शोध कार्य विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों के लिए उपयोगी साबित हुआ है।
70 से अधिक शोधार्थियों को दिया मार्गदर्शन
प्रो. श्रीवास्तव ने 32 पीएचडी, 32 एमटेक और 38 बीटेक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षित अनेक विद्यार्थी बहुराष्ट्रीय कंपनियों, निजी उद्योगों, सरकारी संगठनों, सार्वजनिक उपक्रमों और विश्वविद्यालयों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। उनके कई विद्यार्थियों ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, भारतीय प्रबंध संस्थानों तथा अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और फिलीपींस के प्रतिष्ठित संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
किसानों की उत्पादकता बढ़ाने पर रहा जोर
प्रो. श्रीवास्तव ने हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि पर उन्नत तकनीकों के प्रदर्शन और कृषि यंत्रीकरण के प्रसार में योगदान दिया। कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय के साथ मिलकर उन्होंने कस्टम हायरिंग केंद्रों और आधुनिक कृषि उपकरणों को प्रोत्साहित किया। इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों को कृषि कार्यों में मशीनों की सुविधा उपलब्ध कराना, लागत कम करना और उत्पादकता बढ़ाने में सहायता देना रहा है।
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में निभाई भूमिका
उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की विभिन्न परियोजनाओं के साथ अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई), फिलीपींस और जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) की सहयोगी परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और आईसीएआर के संस्थानों की शैक्षणिक, चयन एवं अनुसंधान समितियों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश शासन के कृषि विभाग को भी विशेषज्ञ परामर्श दिया है।
विश्वविद्यालय परिवार ने दी बधाई
11 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित प्रो. श्रीवास्तव की इस उपलब्धि पर जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.के. मिश्रा सहित विश्वविद्यालय परिवार ने उन्हें बधाई दी। प्रो. श्रीवास्तव ने सम्मान के लिए अपने माता-पिता, गुरुजनों, सहकर्मियों, शोधार्थियों, परिवार और कृषक समुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया।