खमरिया में बनेंगे हाईटेक बम और टैंकभेदी गोला-बारूद

जबलपुर। भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद देश के रक्षा उत्पादन को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। इसी कड़ी में जबलपुर स्थित ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया (ओएफके) में सेना की मारक क्षमता बढ़ाने वाले अत्याधुनिक और स्वदेशी हथियारों के उत्पादन को गति मिलेगी। फैक्ट्री में विभिन्न श्रेणी के एरियल बमों के साथ आधुनिक टैंकभेदी गोला-बारूद का निर्माण किया जाएगा।रक्षा सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एल-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन के प्रभावी प्रदर्शन के बाद इसके उत्पादन में भी तेजी लाई जाएगी। इसके अलावा ओएफके में 120, 220, 450 किलोग्राम और 1000 पाउंड (थाउजेंड पाउंडर) श्रेणी के बमों का निर्माण प्रस्तावित है।

फैक्ट्री में राफेल और जगुआर लड़ाकू विमानों के लिए 500 और 1000 किलोग्राम के स्वदेशी जनरल पर्पस (जीपी) एरियल बम तैयार किए जाएंगे। वहीं 250 किलोग्राम के बम विशेष रूप से बंकरों, सैन्य ठिकानों और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने के लिए विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही आधुनिक टैंकों के लिए 125 मिमी एफएसएपीडीएस (FSAPDS) टैंकभेदी गोला-बारूद का उत्पादन भी ओएफके में किया जाएगा।रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन हथियारों के उत्पादन से भारतीय सेना की युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही, जबलपुर की ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया एक बार फिर देश के रक्षा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगी। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वदेशी रक्षा निर्माण को नई मजबूती देने के साथ-साथ देश की सामरिक तैयारियों को भी और सशक्त बनाएगी।