शुद्ध पेयजल आपूर्ति में निगम के दावे पर उपभोक्ता मंच की आपत्ति, एनजीटी ने पेश जांच रिपोर्ट को बताया असत्य


जबलपुर। शहर में पेयजल पाइपलाइन की स्थिति और पेयजल की शुद्धता को लेकर नगर निगम की ओर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में प्रस्तुत रिपोर्ट पर नागरिक उपभोक्ता मंच ने कड़ी आपत्ति जताई है। नगर निगम की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जबलपुर में पीने के पानी की पाइपलाइन नालों-नालियों से होकर नहीं गुजर रही हैं और नागरिकों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।

वहीं नागरिक उपभोक्ता मंच ने इन दावों को गलत और असत्य बताते हुए आपत्तियां प्रस्तुत करने की तैयारी की है। जानकारी के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सेंट्रल जोनल बेंच के जस्टिस भवर कुमार सिंह तथा एक्सपर्ट मेंबर सुजीत कुमार चतुर्वेदी की संयुक्त पीठ ने 3 नवंबर को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता अधिवक्ता पी.जी. नागपाड़े एवं रजत भार्गव को दो सप्ताह के भीतर संयुक्त समिति की रिपोर्ट पर आपत्तियां प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में बताया है कि जबलपुर में पीने के पानी की लगभग 60 प्रतिशत पाइपलाइन नालों-नालियों से होकर गुजर रही हैं। ये पाइपलाइन 40 से 50 वर्ष पुरानी हैं और इनमें जगह-जगह लीकेज हो रहे हैं। इसके कारण पेयजल के दूषित होने की आशंका बनी हुई है। मामले में एनजीटी ने नगर निगम, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त समिति गठित कर 30 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

इसके परिपालन में 1 नवंबर 2026 को एनजीटी में रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि शहर की पेयजल पाइपलाइन नालों-नालियों से नहीं गुजर रही हैं तथा शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हो रही है। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता एवं याचिकाकर्ता पक्ष के प्रतिनिधि प्रभात यादव ने इस रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे गलत एवं असत्य बताया।

इसके बाद एनजीटी ने याचिकाकर्ताओं को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है। अब सबकी निगाहें याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों और पेयजल पाइपलाइन की वास्तविक स्थिति को लेकर होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।