जबलपुर,। जबलपुर मेडिकल आर्युविज्ञान विश्वविद्यालय (एमपीएमएसयू) का बंटवारा यह समूचे भारत में पहला उदाहरण बना है, जहां किसी राज्य के मेडिकल यूनिवर्सिटी को टुकड़ों में बांटा गया है। महाराष्ट्र, तामिलनाडू, पश्चिम बंगाल आदि बड़े राज्यों में भी मेडिकल यूनिवर्सिटी एक ही बनाए रखी गई है। लिहाजा मप्र में क्या सोचकर एमपीएमएसयू को टुकड़ों में बांटा जा रहा है। यह प्रश्न उठाते हुए नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, भारतीय वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन, महिला समिति, सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन तथा किसान समिति ने सोमवार को घंटाघर के पास विरोध प्रदर्शन कर आक्रोश व्यक्त किया।
जन संगठनों ने जबलपुर के सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधियों के सामने प्रश्न खड़ा किया है कि आखिर उन्होंने मेडिकल यूनिवर्सिटी के विखण्डन पर आपत्ति क्यों नहीं दर्ज की। जन संगठनों ने चिन्ता व्यक्त की जबलपुर में संस्थाओं में विखण्डन का सिलसिला कब तक चलेगा। हाईकोर्ट, विद्युत मण्डल, कृषि विश्वविद्यालय, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय आदि कई संस्थाओं का विखण्डन हो चुका है। जिससे जबलपुर का कद घट गया है।
प्रदर्शन में डॉ.पी. जी. नाजपाण्डे, टी. के. राय घटक, डी. के. सिंह, सुभाष चन्द्रा, सुशीला कनौजिया, संतोष श्रीवास्तव, राजेश गिदरोनिया, उमा दाहिया, मनीषा अग्रहरि, ममता पटेल, पी.एस. राजपूत, हरजीवन विश्वकर्मा, अर्जुन कुमार परीड़ा, नन्दकिशोर सोनकर, दिलीप कुंडे, अशोक नामदेव, विनायक सोरते, के.सी. सोनी, अब्दुल रहमान आदि शामिल थे।