जबलपुर, ।धान खरीदी का सीजन सिर पर है और किसानों का गुस्सा सड़क पर उतर आया है। मंगलवार को जबलपुर जिले के सैकड़ों किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर जिला मुख्यालय पहुंचते हुए सरकार और प्रशासन के सामने अपनी मांगों को लेकर जोरदार हुंकार भरी। किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें भावांतर योजना नहीं, बल्कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सीधे धान खरीदी चाहिए।किसानों का कहना है कि मंडियों में समर्थन मूल्य से कम दर पर उपज बेचने की मजबूरी उन्हें लगातार आर्थिक नुकसान की ओर धकेल रही है। जिला अध्यक्ष रामदास पटेल ने कहा कि किसानों को मंडियों के भरोसे छोड़कर लूट का शिकार नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि आज कई मंडियां किसानों के लिए राहत के बजाय परेशानी और शोषण का माध्यम बनती जा रही हैं।किसान अपनी 15 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपेंगे। इसमें फसल भुगतान में देरी, धान का समर्थन मूल्य ₹3100 प्रति क्विंटल, गेहूं की खरीदी ₹2700 प्रति क्विंटल की दर से कराने, बिजली व्यवस्था सुधारने, खाद-पानी की उपलब्धता और किसानों के साथ हो रहे कथित फर्जीवाड़े पर रोक लगाने सहित कई मांगें शामिल हैं।किसानों ने सरकार से मांग की है कि धान की खरीदी ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से की जाए और प्रति एकड़ 25 क्विंटल की सीमा निर्धारित की जाए। उनका कहना है कि मंडियों में समर्थन मूल्य से नीचे बोली नहीं लगनी चाहिए। साथ ही खरीदी केंद्रों से जुड़े वेयरहाउसों को पहले खाली कराने की मांग भी उठाई गई है।
बकाया भुगतान पर भी किसानों का आक्रोश
मझौली तहसील में धान, गेहूं और मूंग के लंबित भुगतान तत्काल जारी करने की मांग की गई है। वहीं पनागर तहसील के चंसोरिया, शुभी अक्षय और नर्मदा एग्रो वेयरहाउस से जुड़े बकाया भुगतान का भी तत्काल निराकरण करने की मांग किसानों ने रखी है।
नकली बीज का आरोप, कंपनियों की जांच की मांग
किसानों ने हाइब्रिड बीज कंपनियों पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कुछ कंपनियों द्वारा बीज को बीएलबी और बीपीएच जैसी बीमारियों से रोधी बताने के बावजूद फसल खराब हुई। किसानों ने पूरे मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाली कंपनियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
माल खरीदा, भुगतान नहीं किया तो व्यापारी पर एफआईआर
शहपुरा में किसानों की उपज खरीदने के बाद भुगतान नहीं करने वाले व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। किसानों ने संबंधित व्यापारियों की शीघ्र गिरफ्तारी कर बकाया राशि दिलाने की मांग की है।
पराली पर कार्रवाई से पहले साधन उपलब्ध कराए प्रशासन
किसानों ने कहा कि पराली निष्पादन के पर्याप्त साधन उपलब्ध कराए बिना किसानों पर एफआईआर और नोटिस की कार्रवाई उचित नहीं है। जब तक प्रशासन किसानों को पराली प्रबंधन के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराता, तब तक ऐसी कार्रवाई रोकने की मांग की गई है।
मंडी में किसान के नाम पर बिचौलियों का खेल बंद हो
मंडी में किसानों के नाम पर बिचौलियों द्वारा उपज बेचने और फर्जी होल्ड के मामलों पर रोक लगाने के लिए किसानों ने आधार कार्ड और फोटो स्कैन की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है। किसानों का कहना है कि इससे वास्तविक किसान की पहचान सुनिश्चित होगी और उसके नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा।
बिजली संकट भी बना बड़ा मुद्दा
किसानों ने कृषि बिजली व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए मझौली के रानीताल कटाव सबस्टेशन का निर्माण कार्य तेज कर उसे जल्द चालू करने की मांग की है। साथ ही किसानों को दिन में 12 घंटे कृषि बिजली उपलब्ध कराने और सिहोरा तहसील में अधिक भार वाले ट्रांसफार्मरों को बदलने की मांग रखी गई है।
खेत तक सड़क, राजस्व मामलों का समय पर निराकरण
किसानों ने ‘किसान खेत सड़क योजना’ तत्काल शुरू करने तथा राजस्व संबंधी मामलों का निर्धारित समय सीमा में निराकरण करने की मांग भी की है।
ट्रैक्टरों के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे किसानों ने साफ संकेत दिया कि इस बार मुद्दा सिर्फ धान की कीमत का नहीं, बल्कि किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य, समय पर भुगतान और खेती के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का है। अब किसानों की 15 सूत्रीय मांगों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर जिले के किसानों की नजर रहेगी।