महिला सुरक्षा की मांग वाली PIL पर हाई कोर्ट में यू-टर्न, याचिकाकर्ता पर ही यौन उत्पीड़न शिकायत का खुलासा

जबलपुर। मध्य प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH कानून) के तहत समितियों के गठन की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका हाई कोर्ट में उस समय पलट गई, जब सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के खिलाफ ही महिला कर्मचारी द्वारा की गई यौन उत्पीड़न की शिकायत का मामला सामने आ गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने याचिका निरस्त कर दी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ के समक्ष यह जनहित याचिका रीवा में पदस्थ मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी संजीव कुमार मेहरा ने दायर की थी।

पूरे प्रदेश में समितियों के गठन की उठाई थी मांग………

याचिका में कहा गया था कि सरकारी कार्यालयों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत आंतरिक शिकायत समिति (Internal Committee) का गठन अनिवार्य है। सर्वोच्च न्यायालय भी इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दे चुका है, लेकिन प्रदेश के कई विभागों में इनका पालन नहीं किया जा रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद समितियां नहीं बनाई गईं, इसलिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

बोर्ड ने अदालत में रखी अलग तस्वीर……..

सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने याचिका का विरोध करते हुए बताया कि याचिकाकर्ता वर्ष 2024 में सिंगरौली में पदस्थ थे। उसी दौरान एक महिला कर्मचारी ने उनके खिलाफ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी।

बोर्ड ने यह भी बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद 8 अगस्त 2024 को रिपोर्ट प्रस्तुत हुई थी, जिसके आधार पर बोर्ड के अध्यक्ष ने याचिकाकर्ता के खिलाफ विभागीय जांच की अनुशंसा की थी।

अदालत के सख्त रुख के बाद वापस ली याचिका…………

जब अदालत के सामने याचिकाकर्ता के खिलाफ लंबित शिकायत और विभागीय कार्रवाई की जानकारी आई तो खंडपीठ ने मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई। अदालत ने अनुमति देते हुए याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया।

क्या है POSH कानून?…………

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH कानून) महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है।

इस कानून के प्रमुख प्रावधान………..

निर्धारित संख्या में कर्मचारियों वाले प्रत्येक संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है।समिति कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच करती है।शिकायतों का समयबद्ध निपटारा और पीड़ित महिला को सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना कानून का उद्देश्य है।