जबलपुर। दीपावली का पर्व दो परिवारों के लिए खुशियों और नई उम्मीदों की सौगात लेकर आया। एक ओर जहां दुर्घटना में अपने प्राण गंवाने वाले स्वर्गीय नरेंद्र रजक के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, वहीं दूसरी ओर उनके परिजनों के मानवतापूर्ण निर्णय ने दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी भर दी। नरेंद्र रजक के मरणोपरांत किए गए नेत्रदान से दो मरीजों को नई दृष्टि मिली है। उनका यह निर्णय समाज के लिए अंगदान और नेत्रदान की प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।
जानकारी के अनुसार, दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड घोषित किए गए स्वर्गीय नरेंद्र रजक के परिजनों ने दुख की इस घड़ी में भी मानवता का परिचय देते हुए अंगदान का निर्णय लिया। उनके इस फैसले के तहत हृदय, किडनी, लिवर, त्वचा और फेफड़ों के साथ दोनों आंखों को भी सुरक्षित किया गया। दादा वीरेंद्र पुरी जी नेत्र आई बैंक की टीम ने प्रख्यात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन स्थापक के मार्गदर्शन में दोनों आंखों को सफलतापूर्वक संरक्षित किया। इसके बाद गोलबाजार स्थित जनज्योति सुपर स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल में सूक्ष्म माइक्रोस्कोपिक शल्य चिकित्सा के माध्यम से दोनों कॉर्निया का प्रत्यारोपण दो जरूरतमंद मरीजों में किया गया।
नरसिंहपुर की महिला और सिवनी के युवक को मिली नई रोशनी………….
नेत्र प्रत्यारोपण का लाभ पाने वालों में पहली 55 वर्षीय महिला नरसिंहपुर निवासी हैं। पूर्व में आंख के ऑपरेशन के दौरान उनकी कॉर्निया खराब हो गई थी, जिससे उनकी दृष्टि प्रभावित हो गई थी। वहीं दूसरे मरीज 43 वर्षीय युवक सिवनी निवासी हैं, जिनकी आंख में छाला होने के कारण कॉर्निया क्षतिग्रस्त हो गई थी। नरेंद्र रजक के नेत्रदान से मिले कॉर्निया के सफल प्रत्यारोपण के बाद दोनों मरीजों को फिर से दुनिया देखने का अवसर मिला है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने किया सफल ऑपरेशन…….
यह जटिल प्रत्यारोपण डॉ. आयुष टंडन, डॉ. अर्पिता स्थापक, डॉ. अपूर्वा स्थापक, डॉ. पवन स्थापक एवं जनज्योति सुपर स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल की विशेषज्ञ चिकित्सा टीम द्वारा संपन्न किया गया। अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों मरीजों की स्थिति स्वस्थ है और वे अब स्पष्ट रूप से देख पा रहे हैं।
परिजनों का त्याग समाज के लिए प्रेरणास्रोत……
इस अवसर पर डॉ. पवन स्थापक ने भावुक होते हुए कहा कि स्वर्गीय नरेंद्र रजक के परिजनों का नेत्रदान और अंगदान का निर्णय अत्यंत वंदनीय एवं अभिनंदनीय है। उनके इस त्याग और उदारता से दो लोगों के जीवन में दीपावली सचमुच रोशनी लेकर आई है। उन्होंने जनज्योति सुपर स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल परिवार और दादा वीरेंद्र पुरी जी नेत्र आई बैंक की ओर से शोकाकुल रजक परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उनके मानवीय निर्णय के लिए आभार जताया। स्वर्गीय नरेंद्र रजक अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके नेत्रों से दो लोगों की दुनिया रोशन हो गई। उनका यह योगदान बताता है कि मृत्यु के बाद भी इंसान अपने अंगदान के माध्यम से दूसरों के जीवन में नई उम्मीद और उजाला भर सकता है।