जबलपुर। सवर्ण समाज के बैनर तले महामहिम राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन जबलपुर जिला कलेक्टर को सौंपा गया। ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था को जातिगत आधार के बजाय आर्थिक आधार पर सुनिश्चित किए जाने की मांग की गई है। इस दौरान ब्राह्मण, ठाकुर और वैश्य समाज के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में एकत्र हुएज्ञापन में मांग की गई कि आरक्षण को शिक्षा पद्धति से पूरी तरह अलग रखा जाए। शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण को लेकर गठित किए जा रहे एक बोर्ड पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की गई। इसके साथ ही यूजीसी के तथाकथित “काले कानून” को वापस लिए जाने की मांग रखी गई। ज्ञापन में यह तर्क भी दिया गया कि जब अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम (एससी-एसटी एक्ट) में अब तक करीब 50 बार संशोधन किया जा चुका है, तो वर्तमान परिस्थितियों में भी इसमें संशोधन किया जाना चाहिए।ज्ञापन सौंपने वालों का कहना था कि आजादी के समय आरक्षण व्यवस्था एक पिछड़े और द्रवित समाज को मुख्यधारा से जोड़कर अन्य वर्गों के समकक्ष लाने के उद्देश्य से बनाई गई थी, लेकिन वर्तमान में इसका दुरुपयोग हो रहा है। इसी वजह से आरक्षण व्यवस्था पर अंकुश लगाना आवश्यक बताया गया।ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन है, लेकिन यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो समाज उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। इसकी संपूर्ण जवाबदेही शासन और प्रशासन की होगी, ऐसा प्रतिनिधियों ने कहा।ज्ञापन सौंपने वालों में राम दुबे, कपिल दुबे, विनोद शर्मा, अजय अग्रवाल, एडवोकेट विशुद्ध जैन, दिलीप सिंह ठाकुर, विशाल ठाकुर, रघुवंशी, महेंद्र गुप्ता, पीयूष वर्मा, अमित दुबे, राहुल दुबे, अतुल दुबे, सारंग दुबे, प्रतीक जैन और सुजस दुबे प्रमुख रूप से मौजूद रहे।