रक्षा मंत्रालय के स्वीकृत रिक्त पदों पर नियुक्त कर्मचारियों को मिलेगी पुरानी पेंशन योजनाएआईडीईएफ के संघर्ष को मिली सफलता,

जबलपुर। केंद्रीय कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिलाने के लिए अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) द्वारा लंबे समय से किए जा रहे संघर्ष को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। महासंघ के प्रयासों के फलस्वरूप 6 नवंबर को कोलकाता स्थित रक्षा आयुध विभाग के सक्षम कार्यालय ने सभी क्षेत्रीय इकाइयों को निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त ऐसे कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी, जिनकी नियुक्ति पूर्व में स्वीकृत रिक्त पदों के आधार पर संबंधित ट्रेड के अनुसार की गई है।महासंघ द्वारा लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि 22 दिसंबर 2003 से पूर्व आयुध निर्माणी बोर्ड द्वारा जारी रिक्त पदों के स्वीकृति पत्र को नियुक्ति अधिसूचना के समकक्ष मान्यता दी जाए। ऐसे स्वीकृत पदों के विरुद्ध 1 जनवरी 2004 अथवा इसके बाद नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के दायरे में शामिल किया जाए।

इसके अलावा रक्षा मंत्रालय द्वारा 20 मई 2023 को जारी रिक्त पदों के स्वीकृति पत्र तथा भारी वाहन निर्माणी (एचवीएफ) टी-90 के स्वीकृति पत्र को भी पुरानी पेंशन योजना के लिए नियुक्ति अधिसूचना के रूप में मान्यता देने की मांग की गई थी। इस संबंध में रक्षा आयुध विभाग द्वारा जारी निर्देशों में 22 दिसंबर 2003 से पहले आयुध निर्माणी बोर्ड द्वारा जारी रिक्त पदों के स्वीकृति पत्र को पुरानी पेंशन योजना के लिए नियुक्ति अधिसूचना के रूप में मान्यता देने का प्रावधान किया गया है।

एआईडीईएफ ने आयुध निर्माणियों से संबद्ध सभी यूनियनों से इन निर्देशों का गंभीरता से अध्ययन कर पात्र कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है।

महासंघ के अध्यक्ष एस.एन. पाठक एवं महासचिव सी. कुमार ने कहा कि जिन कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पूर्व में स्वीकृत रिक्त पदों के आधार पर हुई है, उन्हें पुरानी पेंशन योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। कर्मचारियों के पेंशन संबंधी अधिकारों की रक्षा के लिए महासंघ अपना संघर्ष निरंतर जारी रखेगा।मीडिया प्रमुख उत्तम विश्वास से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस महत्वपूर्ण पहल को संगठन के पदाधिकारियों ने कर्मचारियों के हित में महासंघ के निरंतर संघर्ष का परिणाम बताया है। संगठन मंत्री अर्नब दास गुप्ता, रोहित यादव, अमरीश सिंह, राकेश दुबे, शिव पांडे एवं माखन सिंह कहार ने इसे कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई में महत्वपूर्ण उपलब्धि निरूपित किया।