जबलपुर। कछपुरा रेलवे साइडिंग मालगोदाम से फैल रहे धूल और वायु प्रदूषण के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट में रेलवे साइडिंग पर धूल प्रदूषण की गंभीर स्थिति सामने आने के बाद एनजीटी ने रेलवे एवं अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से 30 अक्टूबर 2026 को एनजीटी में प्रस्तुत जवाब में बताया गया कि 20 अप्रैल 2026 को किए गए निरीक्षण के दौरान कछपुरा रेलवे साइडिंग मालगोदाम में भारी वाहनों की आवाजाही तथा लोडिंग-अनलोडिंग के कारण धूल का अत्यधिक उत्सर्जन पाया गया। इसके अलावा धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए रेलवे द्वारा पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं। रेलवे साइडिंग के चारों ओर वृक्षारोपण भी नहीं कराया गया है, जिसके कारण आसपास के क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर बनी हुई है।
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि रेलवे साइडिंग पर फ्रेट ट्रेन की लोडिंग-अनलोडिंग के साथ सीमेंट की भी लोडिंग-अनलोडिंग की जा रही है। जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 5 अप्रैल 2023 को केवल फ्रेट ट्रेन की लोडिंग-अनलोडिंग की अनुमति प्रदान की थी। इसके बावजूद सीमेंट और आयरन ओर की लोडिंग-अनलोडिंग किए जाने का मामला सामने आया है। बोर्ड की रिपोर्ट में धूल उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए समुचित व्यवस्था नहीं होने की बात भी कही गई है।
50 हजार लोगों के प्रभावित होने का दावा……..
उल्लेखनीय है कि डॉ. पी.जी. नाजपांडे तथा रजत मार्गव द्वारा एनजीटी में अवमानना याचिका दायर कर बताया गया है कि कछपुरा मालगोदाम से उड़ने वाली धूल के गुबार के कारण आसपास के करीब 50 हजार रहवासियों का जीवन दूभर हो गया है। याचिका में कहा गया है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2023 में केवल फ्रेट ट्रेन की लोडिंग-अनलोडिंग की अनुमति दी थी, लेकिन इसके बावजूद सीमेंट और आयरन ओर की लोडिंग-अनलोडिंग की जा रही है।
इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने याचिका पर नोटिस जारी किया था। अधिवक्ता प्रभात यादव ने बताया कि एनजीटी ने रेलवे तथा अन्य संबंधित पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में भी रेलवे साइडिंग से वायु प्रदूषण की स्थिति और आसपास के क्षेत्र में इसके दुष्प्रभावों की पुष्टि हुई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2027 को होगी।