जबलपुर ।* मां नर्मदा के पावन तट पर राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष की गौरवशाली यात्रा के उपलक्ष्य में घोष वादन का भव्य एवं भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित हुआ। अखिल भारतीय घोष प्रमुख पंकजा एवं अखिल भारतीय सह घोष प्रमुख प्राची पाटील की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न इस कार्यक्रम में सेविकाओं ने अपनी सामूहिक साधना और स्वर-साधना मां नर्मदा के चरणों में समर्पित की।कार्यक्रम में 132 सेविकाओं ने एक साथ 10 विभिन्न रचनाओं का वादन किया। शिव वंदना, ओंकार, मीरा रचना सहित भारतीय शास्त्रीय संगीत की रागदारी पर आधारित प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक चेतना स्पष्ट झलकी।एक समान शुभ्र वेश में सजी अनुशासित पंक्तियां, घोष वाद्यों की एकलय ध्वनि और कदमों की एकरूपता ने वातावरण को विशेष गरिमा प्रदान की। यह दृश्य वहां उपस्थित पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा, जो इसे कौतूहल और श्रद्धा के साथ निहारते रहे।
इस आयोजन की विशेषता केवल वादन की उत्कृष्टता नहीं, बल्कि उसमें दिखी समरसता और संगठन भावना भी थी। अलग-अलग परिवारों, क्षेत्रों और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आई सेविकाएं एक ही ध्येय, एक ही भाव और एक ही लय में बंधकर सामाजिक समरसता और संगठन शक्ति का सजीव उदाहरण बनीं।घोष प्रात्यक्षिकों के माध्यम से भारतीय संस्कृति के शुभ एवं मांगलिक चिह्नों की आकर्षक आकृतियां साकार की गईं। विशेष रूप से मां नर्मदा के मातृस्वरूप की आकृति बनाकर अन्य वाद्यों की संगत के साथ मां को प्रदक्षिणा अर्पित की गई। इसमें लय, ताल, अनुशासन और सामूहिक समन्वय का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।राष्ट्र सेविका समिति की 90 वर्षों की यात्रा नारी शक्ति के संगठन, संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रसमर्पण की यात्रा रही है। मां नर्मदा के तट पर हुआ यह घोष वादन उसी साधना का सुंदर प्रतीक बना, जो केवल सुरों का संगम नहीं, बल्कि श्रद्धा, साधना, समरसता और राष्ट्रभावना का अनुपम संगम सिद्ध हुआ।