जबलपुर। माता के दर्शन की ललक, जयकारों से गूंजती सड़कें और विदाई की बेला में छलकती श्रद्धालुओं की आंखें। गढ़ा फाटक की बड़ी महाकाली की विसर्जन यात्रा ने शहर को रातभर भक्ति और आस्था के रंग में सराबोर रखा। विजयादशमी के अवसर पर शुरू हुई यह यात्रा प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए बुधवार, 21 अक्टूबर की सुबह हनुमानताल पहुंची। यहां विधि-विधान से पूजन, आरती और धार्मिक अनुष्ठान के बाद सुबह 10:30 बजे प्रतिमा का विसर्जन किया गया। करीब 16 घंटे तक चले इस आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर माता को भावभीनी विदाई दी।
### आधी रात के बाद भी सड़कों पर डटे रहे भक्त
मंगलवार देर रात से ही बड़ी महाकाली की विदाई यात्रा के स्वागत के लिए शहर के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा। रात करीब 3:30 बजे जुलूस मालवीय चौक पहुंचा तो पूरा इलाका माता के जयकारों से गूंज उठा। देर रात होने के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। जगह-जगह लोगों ने परिवार सहित पहुंचकर माता के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।
### प्रमुख बाजारों में पुष्पवर्षा, जगह-जगह आरती
मालवीय चौक से आगे बढ़ती यात्रा सुपर मार्केट, लॉर्डगंज, बड़ा फुहारा, मिलौनीगंज और घोड़ा नक्कास सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। रास्ते में जगह-जगह स्वागत मंच सजाए गए थे। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर माता का अभिनंदन किया और आरती उतारकर आशीर्वाद लिया। रातभर सड़कों के किनारे खड़े भक्तों की भीड़ और गूंजते जयकारों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बनाए रखा।
बुधवार सुबह यात्रा हनुमानताल के तट पर पहुंची तो वहां पहले से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। विधिवत पूजन-अर्चन और आरती के बाद पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विसर्जन की प्रक्रिया संपन्न कराई। सुबह 10:30 बजे प्रतिमा को जल में विसर्जित किया गया। विदाई के इस क्षण में श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ माता को अंतिम प्रणाम किया। कई भक्त भावुक नजर आए।
बड़ी महाकाली की विसर्जन यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की आस्था और परंपरा का जीवंत स्वरूप बनकर सामने आई। पूरी रात माता के दर्शन के लिए उमड़ते श्रद्धालु, स्वागत में खड़े लोग और विसर्जन के समय भावुक माहौल इस आयोजन की खास पहचान रहे। प्रतिमा के विसर्जन के साथ ही बड़ी महाकाली की विदाई यात्रा का समापन हुआ और श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर माता के आगमन की कामना की।