तीज-चतुर्थी का संगम दुर्लभ संयोग इस साल 12 दिन का होगा गणेश उत्सव पर्व

जबलपुर। जबलपुर शहर सहित पूरे देश में  14 सितंबर सोमवार से गणेशोत्सव का शुभारंभ होने जा रहा है और इस बार पर्व कुछ खास है, क्योंकि वर्षों बाद हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन मनाई जाएंगी। प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य देवेंद्र पोद्दार  ने बताया  कि इस दिन चित्रा नक्षत्र, रवियोग तथा शुभ-शुक्ल योग का दुर्लभ मेल बन रहा है, जिस कारण सामान्य दस दिनों की बजाय उत्सव इस बार बारह दिन तक मनाया जाएगाज्योतिषीय गणना के अनुसार चित्रा नक्षत्र सुबह करीब सात बजे से आरंभ होकर पूरे दिन बना रहेगा। इसी शुभ घड़ी में महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर शिव-पार्वती की आराधना करेंगी और निर्जला व्रत रखकर सुखी दांपत्य जीवन, समृद्धि तथा संतान-सुख की कामना करेंगी। वहीं घर-घर और सार्वजनिक पंडालों में बाल गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।धार्मिक मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म दोपहर के समय हुआ था, इसलिए मूर्ति स्थापना के लिए मध्याह्न काल को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस हिसाब से सुबह पौने बारह बजे से पौने एक बजे के बीच अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जो प्रतिष्ठा के लिए सर्वोत्तम समय होगा। इसके अलावा सुबह सवा सात से सवा नौ बजे तक, दोपहर डेढ़ बजे से साढ़े तीन बजे तक और शाम पौने पांच से रात साढ़े सात बजे तक भी शुभ चौघड़िया उपलब्ध रहेंगे। हालांकि सुबह साढ़े सात से नौ बजे तक राहुकाल रहने से इस अवधि में मूर्ति स्थापना नहीं करने की सलाह दी गई है।त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में पूजन सामग्री, फल-फूल, नए वस्त्र, श्रृंगार और मूर्तियों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ने लगी है। घरों में महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर ढोल की थाप पर नृत्य करते हुए उत्सव की तैयारियों में जुटी हैं। शाम को महिलाएं चार प्रहर की पूजा कर विधिपूर्वक हरितालिका व्रत कथा सुनेंगी। मोहल्लों में झांकियां और साज-सज्जा का काम भी अंतिम दौर में है।बारह दिन तक चलने वाले इस अनुष्ठान का समापन अनंत चतुर्दशी के अवसर पर 25 सितंबर को गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा।