जबलपुर। शताब्दीपुरम में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सोमवार को उस समय विवादों में घिर गई, जब जबलपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और नगर निगम की संयुक्त टीम के सामने उत्तर-मध्य विधानसभा क्षेत्र के विधायक अभिलाष पांडे समर्थकों के साथ पहुंच गए। कार्रवाई का विरोध करते हुए विधायक ने प्रशासन पर गरीब परिवारों के साथ संवेदनहीनता का आरोप लगाया, वहीं स्थानीय लोगों ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम कर दिया। महिलाओं ने बारिश के बीच बेघर किए जाने पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से जवाब मांगा।मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि बरसात के मौसम में बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए मकान तोड़ना अमानवीय है। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
“जरूरत पड़ी तो प्रभावित परिवारों को JDA कार्यालय में ठहराऊंगा”
विधायक अभिलाष पांडे ने अधिकारियों से तीखी बहस करते हुए कहा कि यदि बारिश के बीच करीब 200 परिवारों को बेघर किया गया तो वे सभी प्रभावित लोगों को जबलपुर विकास प्राधिकरण के कार्यालय ले जाकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के कक्ष में ठहराएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गर्मी और सर्दी के मौसम में प्रशासन ने कोई पहल नहीं की, तो फिर बरसात के बीच ही कार्रवाई की जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि होने के नाते वे प्रभावित परिवारों के साथ खड़े हैं और गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।
महिलाओं का दर्द: “बारिश में छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएं?”
कार्रवाई से प्रभावित महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि अचानक मकान तोड़ दिए गए और रहने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने सवाल किया कि बारिश के इस मौसम में छोटे-छोटे बच्चों और परिवार के साथ आखिर वे किसके दरवाजे जाएं।
स्थानीय लोगों ने भी मांग की कि अतिक्रमण हटाने से पहले पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।
प्रशासन बोला—हाईकोर्ट के आदेश का हो रहा पालन
दूसरी ओर जबलपुर विकास प्राधिकरण के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी दीपक कुमार वैद्य ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि वर्ष 2016 में विधिवत एक शिक्षा समिति को आवंटित की जा चुकी थी। इस जमीन पर कब्जा करने वालों को लंबे समय से नोटिस जारी किए जा रहे थे, लेकिन अतिक्रमण नहीं हटाया गया। मामला उच्च न्यायालय पहुंचने के बाद अदालत ने भूमि खाली कराने के निर्देश दिए, जिसके पालन में यह कार्रवाई की गई।
जेडीए अध्यक्ष संदीप जैन ने भी कहा कि पूरी कार्रवाई जिला प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। उनका कहना था कि प्रशासन केवल न्यायालय के आदेशों का पालन कर रहा है और इसमें किसी प्रकार की मनमानी नहीं की गई।
मानवीय संवेदना बनाम कानूनी कार्रवाई
शताब्दीपुरम की यह कार्रवाई अब केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रह गई है। एक ओर अदालत के आदेशों का पालन करने की प्रशासनिक मजबूरी है, तो दूसरी ओर बरसात के बीच बेघर हुए परिवारों की पीड़ा और जनप्रतिनिधियों का विरोध। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।