जबलपुर। सरकार द्वारा म.प्र.आयुर्विज्ञान विवि (एमपीएमएसयू) संशोधन विधेयक 2026 तथा म.प्र. धन्वंतरी स्वास्थ विवि विधेयक 2026 के तहत वर्तमान एक मेडिकल यूनिवर्सिटी को दो मेडिकल यूनिवर्सिटी- जबलपुर तथा उज्जैन में बनाने का निर्णय लिया गया है। सरकार का यह नितिगत निर्णय मनमानी तथा भेदभाव पूर्ण है। इससे भारतीय संविधान के प्रावधानों तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन हुआ है। लिहाजा विधानसभा द्वारा भेजे जाने वाले इस निर्णय को महामहिम राज्यपाल मंजूरी प्रदान नहीं करें, यह इमेल आज डॉ. पी. जी. नाजपांडे तथा रजत भार्गव ने राजभवन भोपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत कोठारी को भेजा है।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (एमपीएमएसयू) के विभाजन के प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान की भावना के विपरीत बताया है। मंच ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि विधानसभा द्वारा पारित मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 तथा मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक-2026 को मंजूरी न दी जाए।
मंच का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था में दोनों विश्वविद्यालयों के बीच समानता नहीं रखी गई है। जारी आंकड़ों के अनुसार उज्जैन विश्वविद्यालय के अंतर्गत 6 संभागों के 31 जिले आएंगे, जबकि जबलपुर विश्वविद्यालय के हिस्से में केवल 4 संभागों के 24 जिले रहेंगे। इसी प्रकार 85 संबद्ध कॉलेजों में से 60 कॉलेज उज्जैन और मात्र 25 कॉलेज जबलपुर को दिए गए हैं। वहीं लगभग 16 हजार विद्यार्थियों में से 14 हजार उज्जैन तथा केवल 2 हजार विद्यार्थी जबलपुर विश्वविद्यालय के अधीन रहेंगे। मंच ने आरोप लगाया कि कार्यक्षेत्र, कॉलेजों और विद्यार्थियों की संख्या में भारी असमानता के कारण जबलपुर मेडिकल विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय पहचान प्रभावित होगी और उसकी शैक्षणिक गुणवत्ता एवं प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि इस विधेयक पर पुनर्विचार करते हुए इसे स्वीकृति न दें, ताकि प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था संतुलित और न्यायसंगत बनी रहे।