जबलपुर – भोलेनाथ ने प्रकृति, परिवार, जीव जंतुओं के साथ पशु पक्षी में भी परमात्मा के सदृश्य मानकर स्वयं शिव दर्शन कराये है।जहाँ शिव है,वहाँ नंदी भी हैं और जहाँ नंदीश्वर हैं वहाँ शिवजी भी हैं।इसका सीधा सा अर्थ यही हुआ कि जहाँ धर्म है वहाँ शिव भी हैं अथवा तो जहाँ शिव हैं,वहीं धर्म भी है।शिवजी का वाहन वृषभ है।वृषभ को धर्म का स्वरूप कहा जाता है अर्थात् शिवजी धर्म की सवारी करते हैं।जीवन के उत्थान एवं मंगल के लिए हमारे जीवन में धर्म की बहुत बड़ी आवश्यकता है।पशु तब तक ही सही दिशा में चलता है जब तक लगाम उसके ऊपर होती है।
पशु को लगाम से एवं मनुष्य को धर्म से ही नियंत्रित किया जा सकता है।अपनी जीवन ऊर्जा का कब,कहाँ और किस रुप में उपयोग करना है,ये धर्म हमें सिखाता है।ज्ञानी व्यक्ति अनासक्त भाव से कर्म करने के कारण कर्म के बन्धन में नहीं फसता।भगवान भोलेनाथ का जीवन हमें बताता है कि जो भी करो,धर्म का अवलंबन लेकर ही करो,जिससे हमको कर्मबंधनों से मुक्ति मिल सके एवं यह मानव जीवन सफल हो सके,उक्त उद्गार जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने नरसिंह मंदिर में श्रावण मास महोत्सव के रूद्राभिषेक में कहे।श्रावण मास में नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में प्रतिदिन प्रातः काल 9 बजे से रूद्राभिषेक, महापूजन अभिषेक महाआरती महाराज जी के सानिध्य में आयोजित है।
नर्मदेश्वर महादेव के महाभिषेक में डा वी के भारद्वाज, शिवम दुबे, एस वी मिश्रा,आचार्य रामफल शास्त्री ,कामता शास्त्री, लालमन मिश्रा,हिमांशु , प्रियांशु सहित भक्तों की उपस्थित रही।