जबलपुर। तहसीलदार कोर्ट को गुमराह करने के लिए आधार कार्ड में कथित तौर पर फोटो बदलकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि इसी कथित फर्जीवाड़े के दम पर नामांतरण और डायवर्सन के आदेश भी हासिल कर लिए गए। अधारताल तहसील की जांच में मामला उजागर होने के बाद विजयनगर थाना पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, महाराजपुर निवासी अम्बकेश्वर बड़गैया की शिकायत पर अधारताल नायब तहसील कार्यालय ने मामले की जांच कराई। जांच के दौरान प्रस्तुत दो आधार कार्डों की प्रतियों में एक ही आधार संख्या पाई गई, लेकिन दोनों पर लगी तस्वीरें प्रथम दृष्टया अलग-अलग मिलीं। पटवारी की जांच रिपोर्ट में भी इस तथ्य की पुष्टि होने के बाद पूरे मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस के हवाले किया गया।
जांच में आरोप है कि नसरीन निखत, मोहम्मद रियाज, शमीमा बानो और मोहम्मद अजहर ने कथित रूप से फोटो परिवर्तित आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के जरिए न्यायालय को गुमराह किया। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 22 अप्रैल 2024 को दो नामांतरण आदेश और दो अलग-अलग डायवर्सन आदेश प्राप्त किए गए।
प्रारंभिक जांच में कूटरचित दस्तावेज तैयार कर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और गलत दस्तावेज प्रस्तुत करने के पर्याप्त आधार मिलने पर विजयनगर थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आधार कार्ड से जुड़े रिकॉर्ड, दस्तावेजों की तकनीकी जांच और पूरे फर्जीवाड़े की कड़ियों को खंगाल रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि यदि विवेचना में आरोप पुष्ट होते हैं तो मामले में और भी लोगों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सरकारी अभिलेखों और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने वाला माना जा रहा है। पुलिस पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच में जुटी है।
पुलिस ने लिखित शिकायत जांच पर चारों आरोपियों के विरूद्ध धारा 229(1), 318(4), 336(3), 340(2), 338 बीएनएस का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना मे लिया गया।