जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में राष्ट्रीय गुणवत्ता मान्यता हासिल करने की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंच गई है। अस्पताल में 31 अक्टूबर से राष्ट्रीय अस्पताल एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाता प्रत्यायन बोर्ड (NABH) की मान्यता के लिए अंतिम निरीक्षण शुरू होगा। दिल्ली से आने वाला विशेषज्ञों का दल तीन दिन तक अस्पताल की व्यवस्थाओं, चिकित्सा सुविधाओं और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं का बारीकी से मूल्यांकन करेगा। इससे पहले दो निरीक्षण पूरे हो चुके हैं।अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. अवधेश सिंह कुशवाहा के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता मान्यता प्राप्त करने के लिए सभी प्रशासनिक और चिकित्सकीय तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। निरीक्षण में अस्पताल की व्यवस्थाओं को निर्धारित मानकों पर परखा जाएगा। इस मान्यता का उद्देश्य मरीजों को सुरक्षित, व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करना है।
**भवन से लेकर चिकित्सा उपकरणों तक की होगी पड़ताल**
विशेषज्ञों का दल अस्पताल के बुनियादी ढांचे, भवन निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली का निरीक्षण करेगा। डॉक्टरों की रोस्टर के अनुसार तैनाती, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता तथा उनके कार्य निष्पादन का मूल्यांकन भी किया जाएगा।
इसके अलावा पैथोलॉजी लैब, ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम और आपातकालीन वार्ड में उपलब्ध जीवनरक्षक उपकरणों की कार्यक्षमता जांची जाएगी। अस्पताल में साफ-सफाई, संक्रमण नियंत्रण, चिकित्सा मशीनों के रखरखाव और नियमित सर्विसिंग की व्यवस्था भी निरीक्षण के दायरे में रहेगी।
**मरीजों के रिकॉर्ड और दवा प्रबंधन पर भी नजर**
निरीक्षण के दौरान मरीजों के पर्चे, उपचार का विवरण, जांच रिपोर्ट, दवाओं के सुरक्षित भंडारण और आवश्यक दस्तावेजों के संधारण की व्यवस्था का तकनीकी सत्यापन किया जाएगा। अस्पताल प्रबंधन की कोशिश है कि सभी विभाग निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप काम करें और निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं में किसी तरह की कमी सामने न आए।
**मान्यता मिलने पर मजबूत होगी गुणवत्ता व्यवस्था
NABH की मान्यता मिलने से अस्पताल की गुणवत्ता व्यवस्था और संस्थागत विश्वसनीयता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे उपचार प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण और शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।हालांकि, इस मान्यता का अर्थ यह नहीं है कि अस्पताल में सभी उपचार स्वतः निःशुल्क हो जाएंगे या प्रत्येक सुविधा की बिना शर्त गारंटी मिल जाएगी। इसका प्रमुख उद्देश्य निर्धारित मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। अब 31 अक्टूबर से शुरू होने वाले अंतिम निरीक्षण के परिणाम पर अस्पताल की राष्ट्रीय गुणवत्ता मान्यता की दिशा में आगे की स्थिति निर्भर करेगी।