मेडिकल यूनिवर्सिटी के पुनर्गठन पर भड़का जनाक्रोश,

जबलपुर। जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के पुनर्गठन में उज्जैन को अधिक जिले आवंटित किए जाने के निर्णय का विरोध तेज हो गया है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने राज्य सरकार के फैसले को मनमाना बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है और इस संबंध में निंदा प्रस्ताव पारित किया है।बुधवार को आयोजित बैठक में मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी 15 वर्ष पुरानी है तथा क्षेत्रफल और जनसंख्या के लिहाज से भी जबलपुर, उज्जैन से बड़ा शहर है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय के पुनर्गठन में उज्जैन के अधीन 31 जिले और जबलपुर के अधीन केवल 24 जिले रखे गए हैं। मंच का कहना है कि यदि पुनर्गठन करना ही था तो दोनों विश्वविद्यालयों के बीच जिलों का समान बंटवारा किया जाना चाहिए था या फिर जबलपुर को अधिक जिले मिलने चाहिए थे।

बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि सरकार का यह निर्णय क्षेत्रीय संतुलन के विपरीत है और इससे जबलपुर की पहचान एवं महत्व को नुकसान पहुंचा है। मंच ने आरोप लगाया कि शहर के हितों की अनदेखी की गई है।

बैठक में वक्ताओं ने यह भी कहा कि मेडिकल यूनिवर्सिटी के पुनर्गठन के मुद्दे पर सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शहर के सम्मान और अधिकारों की मजबूती से पैरवी करने वाला कोई जनप्रतिनिधि दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि, राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा और विधायक लखन घनघोरिया द्वारा विरोध दर्ज कराने का उल्लेख करते हुए मंच ने कहा कि उनकी आपत्तियों को भी अनसुना कर दिया गया।बैठक में डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, टी.के. रायचंदानी, वेदप्रकाश अवधौलिया, सुशीला कनोजिया, गीता पाण्डेय, डी.के. सिंह, पी.एस. राजपूत, मनीष शर्मा, संतोष श्रीवास्तव, रेखा झारिया और राममिलन शर्मा सहित कई सदस्य उपस्थित रहे। बैठक के अंत में सरकार से मेडिकल यूनिवर्सिटी के पुनर्गठन के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की गई।