जबलपुर। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया किमध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा राजधानी भोपाल की बिजली पारेषण व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और सुगम बनाने के उद्देश्य से कालीयासोत डैम के जलभराव क्षेत्र से गुजर रही महत्वपूर्ण 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों एवं टावरों को स्थानांतरित करने का कार्य किया जा रहा है। लगभग तीन से चार दशक पुराने इस तकनीकी चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में मानसून के दौरान डैम के बैकवाटर से घिर जाने के कारण रखरखाव और आपातकालीन मरम्मत कार्य प्रभावित होते रहे हैं।
श्री तोमर ने कहा कि कालीयासोत डैम के बैकवाटर क्षेत्र से होकर गुजरने वाली 132 केवी एमएसीटी लाइन-इन-लाइन-आउट (एलआईएलओ), एमएसीटी-मंडीदीप तथा एमएसीटी-अमरावत खुर्द ट्रांसमिशन लाइनों के प्रभावित हिस्सों को नए मार्ग पर शिफ्ट किया जा रहा है। इस कार्य के अंतर्गत लगभग 12 ट्रांसमिशन टावरों का भी पुनर्स्थापन किया जाएगा।
*जल भराव के कारण में मेंटेनेंस बन गई थी चुनौती*
वर्तमान में जलभराव की स्थिति में कई टावरों तक सड़क मार्ग से पहुंच संभव नहीं हो पाती है, जिसके कारण निरीक्षण, रखरखाव एवं फॉल्ट सुधार कार्यों के लिए तकनीकी दलों को नाव का सहारा लेना पड़ता है। मानसून के दौरान यह कार्य और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी संबंधित ट्रांसमिशन संरचनाएं सड़क मार्ग से सुगमता से पहुंच योग्य हो जाएंगी, जिससे रखरखाव कार्यों में तेजी आएगी और किसी भी आपूर्ति व्यवधान की स्थिति में विद्युत बहाली का समय कम होगा।
*राजधानी की विद्युत व्यवस्था को मिलेगी दीर्घकालीन विश्वसनियता*-
– ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा कि यह परियोजना केवल लाइन शिफ्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि भोपाल की महत्वपूर्ण शहरी पारेषण व्यवस्था की दीर्घकालिक विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इन लाइनों के माध्यम से राजधानी के बड़े हिस्से को विद्युत आपूर्ति प्राप्त होती है, इसलिए जलभराव क्षेत्र से इन्हें बाहर लाने से प्रणाली की परिचालन सुरक्षा और रखरखाव दक्षता दोनों में सुधार होगा।
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*टावरों को जल भराव से मिलेगी सुरक्षा*-
परियोजना पूर्ण होने के बाद ट्रांसमिशन टावरों को लंबे समय तक जलभराव के प्रभाव से भी सुरक्षा मिलेगी। साथ ही तेजी से विकसित हो रहे भोपाल शहर की बढ़ती विद्युत मांग को देखते हुए यह कार्य भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप पारेषण नेटवर्क को और अधिक मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होगा।