रेत खनन ठेका निरस्त कराने की याचिका खारिज, याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये जुर्माना

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ की न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने शहडोल और सिंगरौली में रेत खनन का ठेका संचालित करने वाली सहकार ग्लोबल लिमिटेड के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। खंडपीठ ने पाया कि निजी व्यावसायिक विवाद को लेकर न्यायालय की प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया। वहीं प्रतिवादी कंपनी के अधिवक्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप भी जांच में सही नहीं पाए गए।हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को भविष्य में दूसरे पक्ष के खिलाफ ऐसे आरोप लगाने से बचने की चेतावनी दी, जिनका उद्देश्य न्यायालय की धारणा को प्रभावित करना हो।सीधी निवासी व्यवसायी मनीष सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सहकार ग्लोबल लिमिटेड के खिलाफ जांच कराने और उसका खनन अनुबंध निरस्त करने की मांग की थी। कंपनी को शहडोल और सिंगरौली जिलों में रेत के खनन, भंडारण, परिवहन और बिक्री के लिए माइन डेवलपर-कम-ऑपरेटर नियुक्त किया गया था।

याचिकाकर्ता का आरोप था कि कंपनी ने उसके ट्रक के नाम पर 17 कथित फर्जी ई-ट्रांजिट पास (ईटीपी) जारी किए। याचिकाकर्ता के अनुसार संबंधित वाहन तकनीकी खराबी के कारण करीब एक महीने से बंद था। इसी आधार पर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई और उसका अनुबंध निरस्त करने की मांग की गई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से प्रतिवादी कंपनी के अधिवक्ता शोएब हसन खान पर आरोप लगाया गया कि वे बार-बार मामले का उल्लेख कर सुनवाई टलवा रहे हैं। आरोप था कि ऐसा सिंगरौली क्षेत्र में पड़ी रेत को हटाने का अवसर देने के उद्देश्य से किया जा रहा है।मामले में हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को जांच प्रधान रजिस्ट्रार (न्यायिक) को सौंपते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।प्रधान रजिस्ट्रार (न्यायिक) की 22 अगस्त 2026 की जांच रिपोर्ट में प्रतिवादी के अधिवक्ता शोएब हसन खान के खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं पाए गए। इसके बाद हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियां वापस लेते हुए जांच की कार्यवाही समाप्त कर दी।खंडपीठ ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए याचिका को स्वीकार करने का आधार नहीं पाया और इसे खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ और राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा।