जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने रबी सीजन के ठीक पहले अपने ट्रांसमिशन नेटवर्क की रिएक्टिव पावर कंपनसेशन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इसके परिणामस्वरूप जबलपुर सहित पूरे प्रदेश के एक्स्ट्रा हाई टेंशन (ईएचवी) सबस्टेशनों में वोल्टेज प्रोफाइल बेहतर हुआ है तथा कृषि उपभोक्ताओं सहित सभी उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर, गुणवत्तापूर्ण और मानक वोल्टेज पर विद्युत आपूर्ति मिल रही है।
जबलपुर जिले में 19 कैपेसिटर बैंक………..
जबलपुर जिले के 13 एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों में 19 नग कैपेसिटर बैंक लगे हैं, जिनकी क्षमता 222 एमवीएआर की है। इन कैपेसिटर बैंकों से जिले में वोल्टेज प्रोफाइल बेहतर बनाए रखने तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
29 नये कैपेसिटर बैंक स्थापित………….
एमपी ट्रांसको द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 और वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में अभी तक 29 नए कैपेसिटर बैंकों की स्थापना कर उन्हें सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 750 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं, जिनकी संयुक्त स्थापित क्षमता 9383.5 एमवीएआर हो गई है। यह क्षमता प्रदेश की अब तक की अधिकतम रिएक्टिव पावर मांग 6776 एमवीएआर से लगभग 38 प्रतिशत अधिक है, जिससे भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है।
विद्युत गुणवत्ता और वोल्टेज स्थिरता में सुधार………..
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि प्रदेश शासन की मंशानुरूप उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एमपी ट्रांसको जरूरत के हिसाब से अपने ईएचवी सबस्टेशनों में कैपेसिटर बैंक स्थापित कर चुकी है। कंपनी के 418 सबस्टेशनों में से अधिकांश में विभिन्न क्षमताओं के कैपेसिटर बैंक संचालित हैं। इसके अतिरिक्त पुराने सबस्टेशनों में भी आवश्यकता के अनुसार नए कैपेसिटर बैंक स्थापित किए जा रहे हैं तथा मौजूदा क्षमता में वृद्धि की जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे पूरे प्रदेश में विद्युत गुणवत्ता और वोल्टेज स्थिरता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
52 पुराने कैपेसिटर बैंकों की क्षमता बढ़ाई गई………..
एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता टेस्टिंग एम.वाई. मंसूरी ने जानकारी दी कि कंपनी ने ऐसे 52 पुराने कैपेसिटर बैंकों की पहचान की थी, जिनकी उपयोगी आयु पूर्ण हो चुकी थी और जो अपेक्षित कैपेसिटिव सपोर्ट प्रदान नहीं कर पा रहे थे। इन स्थानों पर अधिक क्षमता वाले नए कैपेसिटर बैंकों की स्थापना एवं पुराने उपकरणों के प्रतिस्थापन का अभियान चलाया गया। इससे सबस्टेशनों की रिएक्टिव पावर कंपनसेशन क्षमता में अभी तक 309 एमवीएआर की बढ़ोतरी हुई और उपभोक्ताओं को बेहतर वोल्टेज पर विद्युत आपूर्ति की जा रही है।
9383.5 एमवीएआर की स्थापित क्षमता………….
वर्तमान में एमपी ट्रांसको के 220 केवी सबस्टेशनों पर 132 केवी सिस्टम के लिए 33 कैपेसिटर बैंक तथा 132 केवी सबस्टेशनों पर 33 केवी सिस्टम पर 717 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं। कुल मिलाकर 750 कैपेसिटर बैंकों के माध्यम से 9383.5 एमवीएआर की स्थापित क्षमता उपलब्ध है, जिसमें 132 केवी की 1073 एमवीएआर तथा 33 केवी की 8310.5 एमवीएआर शामिल है, जो प्रदेश की विद्युत प्रणाली को मजबूत आधार प्रदान कर रही है।
कैपेसिटर बैंक से होता है यह लाभ…………
श्री मंसूरी ने जानकारी दी कि ट्रांसमिशन प्रणाली में सिंचाई पंप, औद्योगिक मोटरें तथा अन्य विद्युत उपकरण प्रायः इंडक्टिव लोड उत्पन्न करते हैं, जिससे वोल्टेज में गिरावट और पावर फैक्टर में कमी आती है। कैपेसिटर बैंक इस इंडक्टिव प्रभाव की भरपाई कर रिएक्टिव पावर उपलब्ध कराते हैं। इससे एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशन में वोल्टेज प्रोफाइल में सुधार होता है, पावर फैक्टर बेहतर होता है, ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता बढ़ती है तथा उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति प्राप्त होती है I