80 रुपए लीटर दाम पर भी शुद्ध नहीं मिल रहा दूध, जिम्मेदार विभाग मौन

जबलपुर। शहर में दूध के दामों में अचानक वृद्धि और दूध की गुणवत्ता को लेकर महाकौशल विकास मंच ने चिंता जताई है। मंच का आरोप है कि डेयरी संचालक मनमाने तरीके से दूध के दाम बढ़ाकर आम जनता पर आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। पहले 74 रुपये लीटर बिकने वाला दूध अब 80 रुपये लीटर तक बेचा जा रहा है, लेकिन दूध के दाम निर्धारित करने का कोई स्पष्ट मापदंड आम उपभोक्ताओं को नहीं बताया जा रहा है। मंच ने जिला प्रशासन से दूध के कारोबार में कथित अनियमितताओं पर अंकुश लगाने की मांग की है।मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि शहर में दूध की शुद्धता, नापतौल और बिक्री के तौर-तरीकों पर प्रभावी निगरानी नहीं होने से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और अधिकारों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। आरोप है कि कुछ पशुपालकों द्वारा प्रतिबंधित इंजेक्शन का इस्तेमाल कर पशुओं से दूध निकाला जा रहा है। वहीं, कुछ दूध विक्रेताओं द्वारा दूध में पानी के अलावा यूरिया, शक्कर, आरारोट और मिल्क पाउडर जैसे पदार्थ मिलाए जाने की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। इन शिकायतों की विभागीय जांच कराया जाना जरूरी है।

मंच ने दूध की बिक्री में घटतौली का मुद्दा भी उठाया है। उसका आरोप है कि कुछ स्थानों पर एक लीटर, आधा लीटर, 200 ग्राम और 100 ग्राम के माप वाले बर्तनों में छेड़छाड़ कर उनकी क्षमता कम कर दी जाती है, जबकि उपभोक्ताओं से पूरी कीमत वसूली जाती है। इसके अलावा प्रतिबंधित प्लास्टिक की थैलियों में खुलेआम दूध की बिक्री होने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

महाकौशल विकास मंच ने नापतौल विभाग, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम से संयुक्त रूप से जांच अभियान चलाने की मांग की है। मंच का कहना है कि दूध विक्रेताओं के माप वाले बर्तनों की नियमित जांच होनी चाहिए। साथ ही दूध की गुणवत्ता की जांच के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला में जांच कराई जाए और मिलावट पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

मंच ने प्रतिबंधित इंजेक्शन के उपयोग की जांच, प्रतिबंधित प्लास्टिक की थैलियों पर रोक और दूध के दामों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी मांग की है। उसका कहना है कि छोटे दुकानदारों के खिलाफ प्रतिबंधित पन्नियों को लेकर कार्रवाई होती है, तो दूध के कारोबार में भी नियमों का समान रूप से पालन कराया जाना चाहिए।महाकौशल विकास मंच के नकुल गुप्ता, अटल उपाध्याय, प्रशांत सोंधिया, विवेक रंजन शुक्ला, नरेश शुक्ला, विवेक शुक्ला, सूर्यकांत गुप्ता, अर्जुन सोमवंशी, हरिओम चौकसे, राजू पटेल और अरुण पटेल ने प्रशासन से मांग की है कि दूध के कारोबार की नियमित निगरानी कर उपभोक्ताओं को शुद्ध दूध और सही मात्रा में दूध उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।