जीएसटी सुधारों के बाद राहत का दावा निकला खोखला!बिजली उपभोक्ताओं पर फ्यूल चार्ज का भार बढ़ा


जबलपुर। प्रदेश में जीएसटी सुधारों के बाद बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलने के दावों पर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने सवाल खड़े किए हैं। मंच का कहना है कि 22 सितंबर 2025 से जीएसटी सुधार लागू होने के बाद भी बिजली दरों में अपेक्षित कमी नहीं आई और फ्यूल चार्ज घटने के बजाय बढ़ता दिखाई दे रहा है। मंच ने बिजली बिलों में वसूले जा रहे फ्यूल चार्ज के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार के राहत संबंधी दावों को कठघरे में खड़ा किया है।


मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग को भेजी शिकायत में कहा है कि जीएसटी सुधारों के बाद बिजली की कीमतों में कमी और उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन जमीनी स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है।


मंच के अनुसार सरकार ने जीएसटी को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत किया, वहीं कंपंसेशन सेस के रूप में लगने वाले 400 रुपये प्रति टन के प्रावधान को हटा दिया गया। इससे कोयले की लागत कम होने और परिणामस्वरूप बिजली के फ्यूल चार्ज में कमी आने की उम्मीद जताई गई थी।


लेकिन मंच का दावा है कि पिछले आठ महीनों के बिजली बिलों के विश्लेषण में फ्यूल चार्ज में कमी के बजाय वृद्धि दिखाई देती है। जनवरी 2026 में फ्यूल चार्ज 1.58 प्रतिशत था, जो अगस्त तक बढ़कर 4.59 प्रतिशत हो गया।

आठ महीनों में फ्यूल चार्ज का उतार-चढ़ाव………

मंच द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक— जनवरी 2026 — 1.58 प्रतिशत, फरवरी 2026 — 1.71 प्रतिशत, मार्च 2026 — 0.63 प्रतिशत, अप्रैल 2026 — 5.36 प्रतिशत, मई 2026 — 3.91 प्रतिशत, जून 2026 — 1.11 प्रतिशत, जुलाई 2026 — 3.77 प्रतिशत, अगस्त 2026 — 4.59 प्रतिशत रहा|
मंच का कहना है कि जनवरी से अगस्त के बीच फ्यूल चार्ज का औसत करीब 3.32 प्रतिशत रहा, जबकि पहले इसके लगभग एक प्रतिशत के आसपास रहने की बात कही गई थी।

सस्ती बिजली के दावे पर भी सवाल…..

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने कहा कि जीएसटी सुधारों के बाद बिजली 22 पैसे प्रति यूनिट तक सस्ती होने और फ्यूल चार्ज में कमी आने की बात कही गई थी। हालांकि, मंच के अनुसार वास्तविक बिलों में उपभोक्ताओं को इसका अपेक्षित लाभ दिखाई नहीं दे रहा है।

मंच ने कहा कि एक ओर सरकार बिजली को सस्ता करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर बिलों में फ्यूल चार्ज का भार उपभोक्ताओं पर बढ़ रहा है। ऐसे में उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जीएसटी सुधारों का वास्तविक लाभ किसे मिल रहा है।

डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, मनीष शर्मा, सुशीला कनोजिया, गीता पांडे, यशवंत कोष्टा, अशोक यादव और श्याम सोलंकी ने कहा कि सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को राहत दिए जाने के दावों और बिजली बिलों में दिखाई दे रही वास्तविक स्थिति के बीच अंतर है।

मंच ने मांग की है कि बिजली बिलों में लगाए जा रहे फ्यूल चार्ज की गणना और इसके निर्धारण की प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाए तथा जीएसटी सुधारों के बाद उपभोक्ताओं को मिलने वाली वास्तविक राहत का सार्वजनिक रूप से हिसाब दिया जाए।