साइबर ठगी के जाल में फंसे फिर 6 लोग, अस्पताल में भर्ती होने का झांसा, लोन का लालच दे उड़ाई रकम


जबलपुर। शहर में साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। रविवार को ही अलग-अलग थानों में दर्ज छह मामलों में साइबर ठगों ने लोगों को अलग-अलग तरीके से निशाना बनाते हुए करीब 3 लाख 67 हजार रुपये से अधिक की रकम पार कर दी। खास बात यह है कि इन घटनाओं में कहीं फोन कॉल के जरिए भावनात्मक दबाव बनाया गया तो कहीं सब्जी खरीदने, लोन दिलाने और डॉक्टर की ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर मोबाइल तथा बैंक खाते को निशाना बनाया गया। पुलिस ने सभी मामलों में बीएनएस की धारा 318(4) सहित संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अस्पताल में भर्ती होने का झांसा………..

अधारताल निवासी 85 वर्षीय नरेंद्र कुमार मिश्रा के मोबाइल पर एक व्यक्ति ने नरेंद्र जैन अधिवक्ता के नाम से कॉल किया। उसने बताया कि उसका रिश्तेदार भोपाल के अपोलो अस्पताल में भर्ती है और उसे हार्ट अटैक आया है। झांसे में लेकर ठग ने नरेंद्र मिश्रा और उनकी पत्नी के बैंक खातों से 1 लाख 2 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए।

शिमला मिर्च के सौदे में 45 हजार की ठगी………..

विजयनगर के सूर्यकांत पटेल सब्जी खरीदने-बेचने का काम करते हैं। 22 सितंबर को राजेश कुमार नामक व्यक्ति ने शिमला मिर्च बेचने के नाम पर उनसे संपर्क किया। छह टन शिमला मिर्च का सौदा तय होने के बाद सागर-रहली में लोडिंग के लिए वाहन भेजा गया। इसी दौरान आरोपी ने बारकोड भेजकर सब्जी का भुगतान करने को कहा। सूर्यकांत ने फोनपे से दो बार में 45 हजार रुपये भेज दिए। वाहन रहली पहुंचा तो न फार्म हाउस मिला और न राजेश कुमार। उसका मोबाइल भी बंद हो गया।

एप खुला और खाते से निकल गए 28 हजार…………..

विजयनगर निवासी बिरयानी दुकान संचालक रोहित मिश्रा ने 26 सितंबर को मोबाइल का लॉक खोला तो फोन हैंग मिला और उसमें वीवो नाम का एप खुला हुआ था। एप में करीब 33 मिनट का टाइमर चल रहा था। कुछ देर बाद एप अपने आप बंद हो गया और खाते से 28 हजार 399 रुपये कटने का मैसेज आया। रोहित के अनुसार उसने कोई लेनदेन नहीं किया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।

लोन के नाम पर लिंक क्लिक कराया………….

गढ़ा निवासी लोको पायलट दिव्यांश हनोतिया को फोन कर एक व्यक्ति ने लोडिंग एप से एक लाख रुपये का लोन स्वीकृत होने की जानकारी दी। दिव्यांश ने लोन लेने से इनकार कर दिया, लेकिन कुछ देर बाद आए लिंक पर गलती से क्लिक हो गया। इसके बाद मोबाइल पर बैंक खाते से रकम कटने का संदेश आया। जांच करने पर पता चला कि फोनपे के माध्यम से उनके इंडियन बैंक खाते से 34 हजार 679 रुपये धरमवीर कुमार के नाम यूपीआई खाते में ट्रांसफर हुए हैं। ठग ने इसे लोन के बैंक वेरिफिकेशन के लिए काटी गई रकम बताकर बात खत्म कर दी।

मोबाइल हैक कर 93 हजार रुपये उड़ाए………….

घमापुर क्षेत्र के अभिषेक कुशवाहा के खाते में 93 हजार 625 रुपये जमा थे। 20 सितंबर को दोस्त का फोन आने पर उन्होंने योनो एप खोला तो खाते में केवल 625 रुपये बचे थे। हिस्ट्री देखने पर खाते से 93 हजार रुपये ट्रांसफर होना सामने आया। अभिषेक ने मोबाइल हैक कर रकम निकालने की शिकायत दर्ज कराई।

डॉक्टर का नंबर गूगल पर खोजा, लगी चपत……………..

घमापुर निवासी जीसीएफ कर्मचारी सुरेंद्र कुमार यादव ने त्वचा रोग विशेषज्ञ का नंबर गूगल पर खोजा। मिले मोबाइल नंबर पर कॉल करने पर ऑनलाइन 10 रुपये की पर्ची काटने को कहा गया। भुगतान के बाद भी बुकिंग नहीं हुई। इसके बाद मोबाइल पर संदिग्ध गतिविधियां शुरू हो गईं। 24 सितंबर को खाते से 46 हजार 349 रुपये कटने के मैसेज मिले। रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर हुई। सुरेंद्र के अनुसार किसी अज्ञात व्यक्ति ने मोबाइल हैक कर रकम निकाली।

6 घटनाएं, 6 तरीके और एक ही खतरा………….

इन छह मामलों में ठगी के तरीके अलग-अलग रहे—भावनात्मक झांसा, ऑनलाइन कारोबार, फर्जी लोन, संदिग्ध एप, मोबाइल हैकिंग और गूगल पर मिले फर्जी संपर्क नंबर। यानी साइबर अपराधी अब केवल बैंक या ओटीपी के नाम पर ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों और भरोसेमंद दिखने वाले संपर्कों के जरिए भी लोगों को निशाना बना रहे हैं।
एक ही दिन दर्ज छह मामलों में 3.67 लाख रुपये से अधिक की ठगी सामने आना शहर में साइबर अपराध की चुनौती को रेखांकित करता है। पुलिस मामलों की जांच कर रही है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं यह भी बताती हैं कि साइबर सुरक्षा को लेकर आम लोगों की सतर्कता अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। जरूरत केवल जागरूकता संदेशों तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि ऐसे अपराधों की रोकथाम, त्वरित शिकायत और ठगी की रकम को तत्काल फ्रीज कराने की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की है।