बरगी बांध से छोड़े पानी ने बढ़ाई पुल की मुश्किलें, चारदीवारी टूटी, आवागमन बंद

जबलपुर। बरगी बांध से हाल ही में छोड़े गए पानी के तेज बहाव ने क्षेत्र में बने करीब चार दशक पुराने छोटे पुल की सुरक्षा व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है। बांध के 17 गेट एक साथ खोले जाने के बाद निकली तेज जलराशि के दबाव से पुल की चारदीवारी पूरी तरह टूट गई। बहकर आई दीवार का मलबा सड़क पर जमा होने से दोनों ओर से चार पहिया वाहनों का आवागमन पूरी तरह थम गया है।

रखरखाव पर उठे सवाल

पुल की दुर्दशा सामने आने के बाद क्षेत्रीय नागरिकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि समय रहते पुल की मरम्मत और आवश्यक रखरखाव किया जाता तो मौजूदा स्थिति से बचा जा सकता था। यह पुल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है और प्रतिदिन सैकड़ों लोगों का आवागमन इसी के माध्यम से होता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार लंबे समय से पुल के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी की जा रही थी। जलस्तर कम होने के बाद जब लोग मौके पर पहुंचे तो टूटी सुरक्षा दीवार और सड़क पर पड़े मलबे का दृश्य देखकर वे हैरान रह गए। नागरिकों का कहना है कि यदि पुल के मुख्य हिस्से को भी नुकसान पहुंचा तो आवागमन का संकट और गंभीर हो सकता है।

हादसे का मंडरा रहा खतरा

पुल की सुरक्षा दीवार टूटने के बाद मौके पर दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है। सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में लोग पैदल अथवा छोटे वाहनों से क्षतिग्रस्त हिस्से को पार करने का प्रयास कर सकते हैं। रात के समय यह खतरा और बढ़ सकता है, क्योंकि अंधेरे में अनजान वाहन चालक क्षतिग्रस्त हिस्से का अंदाजा नहीं लगा पाएंगे।नागरिकों ने संबंधित विभाग से तत्काल मौके का निरीक्षण कर नुकसान का भौतिक सत्यापन कराने और पुल की सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। साथ ही जब तक स्थायी सुधार नहीं होता, तब तक यातायात को सुरक्षित बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता बताई है।इधर, जबलपुर जिले में इस साल मानसून के दौरान बारिश का आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा है। 1 जून से शुरू हुए मानसूनी सीजन के दौरान जिले में अब तक 845.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है, जबकि जिले की औसत वार्षिक बारिश करीब 48 इंच बताई गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक 1180.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी थी।दक्षिण-पश्चिम मानसून राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और गुजरात से वापसी कर चुका है और अब मध्यप्रदेश से भी इसके विदा होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।