जबलपुर।हाेम्यौपैथिक मेडिकल एसोसिएशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, केंद्रीय होम्यौपैथी अनुसंधान परिषद् के वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य और मप्र मेडिकल साइंस विवि में होम्यौपैथी संकाय के अंतर्गत बोर्ड ऑफ स्टडी के सदस्य डॉ. एके द्विवेदी द्वारा लिखित पुस्तक ‘आधुनिक एनीमिया विज्ञान : समग्र वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ का विमोचन गत दिवस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित एक गरिमामय समारोह में किया। विमोचन के बाद मुख्यमंत्री ने पुस्तक का अवलोकन किया और एनीमिया जैसे महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य विषय पर डॉ. द्विवेदी के लेखन एवं जागरूकता संबंधी प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर पुस्तक के सह-लेखक डॉ. अथर्व द्विवेदी भी मौजूद रहे। पुस्तक में डॉ. अथर्व द्विवेदी के साथ अन्य सह-लेखकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। पुस्तक में एनीमिया को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान, पोषण, स्वास्थ्य शिक्षा और जनजागरूकता के व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।एनीमिया को लेकर लंबे समय से जनजागरूकता अभियानडॉ. ए.के. द्विवेदी लंबे समय से एनीमिया के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न अभियानों, स्वास्थ्य शिविरों, हीमोग्लोबिन जांच, पोषण जागरूकता कार्यक्रमों और व्याख्यानों के माध्यम से कार्य कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि एनीमिया को केवल हीमोग्लोबिन की कमी के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसके पीछे मौजूद कारणों की पहचान और समय पर चिकित्सकीय जांच को भी महत्व दिया जाए।उनका मानना है कि एनीमिया की पहचान होने पर केवल हीमोग्लोबिन का स्तर देखना पर्याप्त नहीं है। रोगी की आयु, स्वास्थ्य स्थिति, पोषण, रक्तस्राव, दीर्घकालिक बीमारियों तथा अन्य चिकित्सकीय कारणों का समुचित मूल्यांकन आवश्यक है।
एनीमिया के विभिन्न रूपों का समग्र अध्ययन
‘आधुनिक एनीमिया विज्ञान : समग्र वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ में प्रमुख रूप से अप्लास्टिक एनीमिया, थैलेसीमिया, आयरन डिफिशिएंसी एनीमिया, सिकल सेल एनीमिया, विटामिन की कमी से होने वाला एनीमिया, दीर्घकालिक रोगों में एनीमिया तथा कैंसर एवं उसके उपचार से संबंधित रक्त संबंधी परिवर्तनों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही कैंसर से संबंधित एनीमिया, कैंसर के उपचार के दौरान होने वाले रक्त संबंधी परिवर्तन तथा कीमोथेरेपी एवं रेडियोथेरेपी के संदर्भ में एनीमिया पर चर्चा की गई है। इसके साथ ही क्रॉनिक किडनी डिजीज, लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर दीर्घकालिक बीमारियों में एनीमिया से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है।
सह-लेखकों का महत्वपूर्ण योगदान
पुस्तक में विभिन्न चिकित्सा विषयों से जुड़े विशेषज्ञों का योगदान भी शामिल है। सह-लेखकों में डॉ. वैभव चतुर्वेदी विभागाध्यक्ष मनोचिकित्सा विभाग कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल इंदौर, डॉ. कनक चतुर्वेदी एमडी बायोकेमिस्ट्री तथा डॉ. अथर्व द्विवेदी एमबीबीएस शामिल हैं।एनीमिया-मुक्त समाज के लिए समग्र दृष्टिकोण
डॉ. द्विवेदी के अनुसार एनीमिया की रोकथाम और नियंत्रण के लिए केवल आयरन या किसी एक उपचार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। समय पर जांच, सही निदान, मूल कारण की पहचान, संतुलित पोषण, मूल रोग का उचित उपचार और स्वास्थ्य जागरूकता—इन सभी पहलुओं को साथ लेकर चलना आवश्यक है।